Rajasthan Nikay Chunav : राजस्थान में नगर निकायों के प्रमुख पदों के चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। 21 सितंबर को 305 नगर निकायों में अध्यक्ष और चेयरपर्सन पद के चुनाव प्रस्तावित हैं। चार निकायों में पुनर्मतदान की प्रक्रिया के कारण चुनाव कार्यक्रम बाद में तय होगा। ऐसे में दोनों दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं।
कांग्रेस ने बीजेपी पर खरीद-फरोख्त का लगाया आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उसके पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए कथित तौर पर पैसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बीजेपी पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कई स्थानों पर पार्षदों की बाड़ेबंदी वाले ठिकानों पर पुलिस कार्रवाई और पूछताछ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों को बीजेपी ने खारिज किया है।
कुचेरा में कांग्रेस पार्षद लिंबाराम को लेकर विवाद
नागौर की कुचेरा नगरपालिका में कांग्रेस पार्षद लिंबाराम को लेकर भी विवाद सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साले महेंद्र ने पुलिस में शिकायत देकर लिंबाराम और उनकी पत्नी के कथित तौर पर लापता होने की बात कही और आशंका जताई कि उन पर वोट को लेकर दबाव बनाया जा सकता है। इसके बाद पुलिस उस स्थान पर पहुंची जहां कांग्रेस के पार्षद ठहरे हुए थे।
वीडियो जारी कर कांग्रेस ने सुरक्षित होने की बात कही
मामले के बीच कांग्रेस की ओर से लिंबाराम का एक वीडियो सामने लाया गया। इसमें उन्होंने खुद को सुरक्षित बताते हुए अपनी इच्छा से रहने की बात कही। इस वीडियो के जरिए कांग्रेस ने अपहरण के आरोपों पर सवाल उठाए। वहीं पुलिस की कार्रवाई को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
तेजपाल मिर्धा और पुलिस के बीच भी दिखी तकरार
निकाय चुनाव की इसी सियासी गर्मी के बीच कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदार तेजपाल मिर्धा और पुलिस के बीच कथित तौर पर तकरार की स्थिति भी सामने आई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया के जरिए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने एक अन्य कांग्रेस नेता से जुड़े चैट स्क्रीनशॉट का हवाला देते हुए पुलिस पर निगरानी रखने के आरोप लगाए।
कार को टक्कर लगने का भी किया गया दावा
कांग्रेस की ओर से तेजपाल मिर्धा की कार को कथित तौर पर टक्कर मारे जाने का दावा भी किया गया। पार्टी नेताओं ने इन घटनाओं को निकाय चुनाव से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक तथ्यों से ही स्पष्ट होगी। राजनीतिक दलों के आरोपों को उनके दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को बताया गलत
बीजेपी ने कांग्रेस के खरीद-फरोख्त और पुलिस के कथित इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि किसी पार्षद के परिवार की ओर से शिकायत पुलिस के पास आती है, तो पुलिस का शिकायत की जांच करना सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों के आधार पर लगाए जा रहे सवालों पर भी पलटवार किया है।
बीजेपी ने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर उठाए सवाल
बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के भीतर गुटबाजी का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्षदों के परिवार की शिकायत मिलने पर पुलिस को जांच का अधिकार है। बीजेपी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रशासन का इस्तेमाल उसके पक्ष में किया जा रहा होता, तो अजमेर नगर निगम में कांग्रेस प्रत्याशी से जुड़ी आपत्तियों का निपटारा अलग तरीके से क्यों नहीं हुआ।
25 निकायों में निर्विरोध बोर्ड बनने का दावा
इस राजनीतिक खींचतान के बीच बीजेपी ने 309 नगर निकायों में से 25 जगह निर्विरोध बोर्ड बनने की बात सामने आई है। इनमें भरतपुर नगर निगम भी शामिल है। भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की संख्या महत्वपूर्ण रही और बीजेपी की ओर से एक निर्दलीय प्रत्याशी को नाम वापस लेने के लिए मनाने का दावा किया गया।
निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
राजस्थान के निकाय चुनावों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कई स्थानों पर अहम बनी हुई है। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार 309 निकायों में बीजेपी ने 4,179 और कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते, जबकि 2,273 निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। ऐसे में कई निकायों में अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
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