Rajesh Agarwal : राज्य सरकार में हाल ही में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री बने राजेश अग्रवाल एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान या योजना नहीं, बल्कि उनकी सादगी और जमीन से जुड़ी छवि है। मंत्री बनने के कुछ ही दिनों बाद राजेश अग्रवाल अपने गृह नगर अंबिकापुर की सड़कों पर स्कूटी चलाते नजर आए, वो भी बिना किसी सिक्योरिटी के। इस दौरान वे न ही किसी सरकारी वाहन में दिखे और न ही उनके साथ कोई फॉलो गार्ड या सुरक्षाकर्मी मौजूद था। उन्होंने आम नागरिक की तरह स्कूटी चलाई और स्थानीय मंदिर में भगवान के दर्शन करने पहुंचे।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
राजेश अग्रवाल का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वे सफेद कुर्ता-पायजामा पहने, बिना किसी राजकीय तामझाम के स्कूटी पर नजर आ रहे हैं। मंदिर में भी उन्होंने पूरी सादगी के साथ पूजा-अर्चना की और फिर वापस लौट गए। यूजर्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्हें “जनता का मंत्री”, “सच्चा जनप्रतिनिधि” और “मिट्टी से जुड़ा नेता” जैसे शब्दों से नवाजा है। कई लोगों ने उनकी सादगी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और एपीजे अब्दुल कलाम से भी की।

मंदिर पहुंच कर लिया आशीर्वाद
माना जा रहा है कि मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला मंदिर दर्शन था। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजेश अग्रवाल हर महत्वपूर्ण अवसर पर मंदिर जाकर आशीर्वाद लेते हैं और इस परंपरा को मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने जारी रखा है। इस मौके पर मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। मंत्री ने भी मुस्कुराते हुए सभी से मुलाकात की और कहा कि “मैं जनता की सेवा के लिए यहां हूं, न कि कोई वीआईपी बनने के लिए।”
सादगी पहले से रही है पहचान
राजेश अग्रवाल की छवि हमेशा एक साधारण और मिलनसार नेता के तौर पर रही है। विधायक रहते हुए भी वे अक्सर साइकिल या स्कूटी से सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहुंचते रहे हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र अंबिकापुर में वे जनता के बीच जाकर समस्याएं सुनते हैं, और सीधे संवाद में विश्वास करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री बनने के बाद भी यदि वे इसी सादगी और जमीनी संपर्क को बनाए रखते हैं, तो वे जनता के बीच और अधिक लोकप्रियता हासिल कर सकते हैं।
राजेश अग्रवाल का यह स्कूटी पर सवार होकर मंदिर जाना न केवल उनकी व्यक्तिगत सादगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राजनीति में अब भी ऐसे चेहरे मौजूद हैं जो सत्ता में आने के बाद भी खुद को आम आदमी से अलग नहीं मानते।

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