Rajgarh school controversy : मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया स्थित पीएम श्री स्कूल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्कूल के क्लासरूम में एलईडी स्क्रीन पर पोर्न फिल्म चलाने का वीडियो वायरल हुआ है, जिसने जिलेभर में हड़कंप मचा दिया है। इस शर्मनाक घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग, प्रशासन और बाल कल्याण समिति ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं।
वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि क्लास के दौरान एलईडी स्क्रीन पर अश्लील सामग्री चलाई जा रही है। वीडियो में लगभग 13 छात्र कुर्सियों पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, और कुछ छात्र स्क्रीन के पास खड़े होकर मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। वीडियो में कुछ छात्र हँसते हुए कैमरे से चेहरा छिपाते नजर आ रहे हैं, जो साफ संकेत देता है कि यह घटना जानबूझकर और बिना किसी निगरानी के अंजाम दी गई थी।
प्राचार्य हेमंत यादव ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह वीडियो 8-10 महीने पुराना है और उन्होंने 12 मई 2025 को ही प्राचार्य पद संभाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक युवक बृजमोहन सूर्यवंशी उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था और वीडियो को वायरल न करने के बदले ₹50,000 की मांग कर रहा था। जब उन्होंने इनकार किया, तो वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। “वीडियो मेरे कार्यकाल से पहले का है, इसमें दिख रहे छात्र भी पिछले सत्र के हैं,” – हेमंत यादव, प्राचार्य
वायरल वीडियो और सामाजिक विरोध के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी करण सिंह भिलाला ने ब्यावरा विकासखंड अधिकारी दिलीप शर्मा को मामले की जांच सौंपी है।स्कूल प्रशासन पर यह सवाल उठ रहा है कि जब क्लास में यह गतिविधि हो रही थी, उस समय स्टाफ कहां था और ऐसी गंभीर लापरवाही कैसे हुई?
स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर गंभीर नाराजगी जताई है।उनका कहना है कि छात्रों को दी गई तकनीकी सुविधाओं जैसे एलईडी स्क्रीन का इस तरह दुरुपयोग न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य को भी खतरे में डाल सकता है। “स्कूलों में ऐसी घटनाएं अनुशासनहीनता की हद हैं, प्रबंधन की सख्ती और निगरानी जरूरी है,” – स्थानीय नागरिक
राजगढ़ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष साकेत शर्मा ने इस घटना को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि इस तरह की हरकतों से बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है। समिति ने स्कूल प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। जवाब मिलने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। ब्लैकमेलिंग की शिकायत पर भी पुलिस जांच की संभावना जताई जा रही है। दोषियों और वीडियो बनाने वाले छात्रों के खिलाफ संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
पीएम श्री जैसे सम्मानजनक संस्थानों में इस तरह की घटनाएं न केवल शिक्षा प्रणाली की विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि यह स्पष्ट करती हैं कि तकनीकी संसाधनों के साथ अनुशासन और निगरानी की भूमिका भी उतनी ही अहम है। शिक्षा विभाग को अब तकनीकी निगरानी, साइबर सुरक्षा और छात्र अनुशासन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जा सकें।
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