Rajnath Singh:
Rajnath Singh: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के विरुद्ध की गई भारतीय कार्रवाई किसी प्रतिशोध की भावना से नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और न्याय की रक्षा की प्रेरणा से संचालित थी। उन्होंने बताया कि यह अभियान भगवान कृष्ण के उसी उपदेश से मार्गदर्शित था जिसमें उन्होंने पांडवों को समझाया था कि युद्ध का उद्देश्य व्यक्तिगत बदला या महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि धर्म और सत्य के शासन की स्थापना होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना महाभारत के समय था। उन्होंने कहा कि कृष्ण ने अर्जुन को यह स्पष्ट किया था कि धर्म केवल प्रवचनों से सुरक्षित नहीं रहता, बल्कि उसे कर्मों और साहसिक निर्णयों से संरक्षित किया जा सकता है। रक्षा मंत्री के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर इसी सिद्धांत का आधुनिक रूप था, जिसमें भारत ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कदम उठाया।
रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत की सैन्य कार्रवाई किसी भी प्रकार के उकसावे या प्रतिशोध का परिणाम नहीं थी। इसके पीछे राष्ट्र की सुरक्षा, नागरिकों की रक्षा और वैश्विक शांति का स्पष्ट उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि “हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वही मार्ग अपनाया जिसे धर्मसम्मत माना गया है—जो दूसरों के प्रति किसी दुर्भावना से नहीं, बल्कि अपने देश और मानवता के प्रति कर्तव्य भावना से प्रेरित है।”
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को सहन करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “भारत न तो आतंकवादियों की हिंसा पर चुप बैठेगा और न ही कभी यह दिखाएगा कि वह कमजोर है। हमने हमेशा की तरह दृढ़ता और संकल्प के साथ कार्रवाई की है, और आगे भी राष्ट्र की रक्षा में किसी प्रकार का संकोच नहीं होगा।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि समूचे विश्व को यह महसूस हुआ है कि भारत आतंकवाद से निपटने के लिए न केवल सक्षम है, बल्कि आवश्यक होने पर निर्णायक कार्रवाई करने में भी पीछे नहीं हटेगा।
राजनाथ सिंह ने अपने वक्तव्य में जोर देकर कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति सिर्फ सैन्य शक्ति पर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक सिद्धांतों और धर्म के मार्गदर्शन पर भी आधारित है। उनके अनुसार जब भारतीय सेना कोई कदम उठाती है, तो उसके पीछे केवल रणनीतिक उद्देश्य नहीं होते, बल्कि उस निर्णय में सदियों पुराने सांस्कृतिक आदर्शों और नैतिक मूल्यों की छाप भी होती है।
अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह इस बात का उदाहरण था कि भारत युद्ध तभी करता है जब वह धर्म की रक्षा और मानवता की सुरक्षा के लिए आवश्यक हो। उन्होंने कहा कि “धर्म का पालन करना केवल हमारे ग्रंथों का संदेश नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र का चरित्र भी है, और ऑपरेशन सिंदूर इसी चरित्र का प्रतीक है।”
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