Rajouri Grenade Blast : जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले राजौरी से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां नियंत्रण रेखा (LoC) के अग्रिम इलाके के पास मंगलवार को एक रूटीन ऑपरेशन के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। सीमा सुरक्षा और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात भारतीय सेना की एक टुकड़ी जब अपनी नियमित गश्त पर थी, तभी अचानक एक शक्तिशाली ग्रेनेड विस्फोट हो गया। इस अप्रत्याशित धमाके की चपेट में आने से भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) सहित कुल चार वीर जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस अचानक हुई घटना से सैन्य खेमे और सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है।

नौशेरा सेक्टर में कुमाऊं रेजिमेंट की मुस्तैदी
सैन्य सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक वाकया राजौरी जिले के बेहद संवेदनशील नौशेरा सेक्टर के अग्रिम इलाके का है। वहां सीमा पार से होने वाली किसी भी घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए कुमाऊं रेजिमेंट की एक विशेष टुकड़ी को नियमित गश्त और सघन निगरानी अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जवान जब पूरी सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभाते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी उनके पास मौजूद एक मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड अचानक किन्हीं तकनीकी कारणों से ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी चपेट में पास ही खड़े जेसीओ और तीन अन्य जांबाज सैनिक आ गए और लहूलुहान हो गए।

त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन
संवेदनशील सीमा क्षेत्र में हुए इस अचानक धमाके के तुरंत बाद वहां मौजूद अन्य सतर्क सैनिकों ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला और त्वरित राहत तथा बचाव कार्य शुरू किया। घायल जेसीओ और तीनों जवानों को अत्यंत सुरक्षित तरीके से घटनास्थल से निकाला गया। प्राथमिक उपचार देने के बाद उन्हें तुरंत पास के एक विशेष सैन्य चिकित्सा केंद्र और बाद में उच्च स्तरीय सेना अस्पताल पहुंचाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे उनके इलाज में जुटी हुई है। सेना के आला अधिकारियों ने बताया कि घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है और फिलहाल सभी घायल जवानों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बारामूला के उरी सेक्टर का पिछला हादसा
इस दुखद हादसे ने पिछले सप्ताह घाटी में हुई एक और दर्दनाक घटना की यादें ताजा कर दी हैं। आपको बता दें कि ठीक पिछले मंगलवार को भी जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के अंतर्गत आने वाले उरी सेक्टर में एक ऐसा ही दुघर्टनाजन्य हादसा हुआ था, जिसमें देश ने अपने दो वीर जवानों को खो दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, उरी के कमलकोट में स्थित सेना के एक शिविर के भीतर हथियारों और उपकरणों के रूटीन ट्रांसफर (एक जगह से दूसरी जगह ले जाने) की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान एक हैंड ग्रेनेड अचानक पिन निकलने या गिरने से ब्लास्ट हो गया। घायल दोनों जवानों को तत्काल सेना के 92 बेस अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन चोटें इतनी घातक थीं कि डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अप्रैल महीने में राजौरी में आतंकी साजिश नाकाम
जम्मू-कश्मीर का राजौरी और पुंछ इलाका पिछले कुछ समय से सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इसी साल अप्रैल महीने में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण राजौरी में एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया था। उस दौरान सुंदरबनी क्षेत्र के ठंडीपानी इलाके में एक स्थानीय जल निकाय (नदी-नाले) के पास ग्रामीणों ने एक संदिग्ध आईईडी (IED) जैसा दिखने वाला बक्सा देखा था। ग्रामीणों की सूचना पर तुरंत सुरक्षा बल और पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके की सघन घेराबंदी कर उसे सुरक्षित किया गया।
बम निरोधक दस्ते की त्वरित कार्रवाई
जब सेना और स्थानीय पुलिस के बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) ने उस संदिग्ध लोहे के बक्से की बारीकी से जांच की, तो उसके भीतर बेहद पेशेवर तरीके से सीलबंद करके रखे गए दो जिंदा और शक्तिशाली ग्रेनेड बरामद हुए। आतंकियों द्वारा सुरक्षा बलों या स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाने के उद्देश्य से यह विस्फोटक वहां छिपाया गया था। बम निरोधक दस्ते ने अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद सूझबूझ के साथ उन दोनों ग्रेनेड को आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाकर सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज (नष्ट) कर दिया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया था। फिलहाल ताजा हादसे के बाद पूरी एलओसी पर चौकसी और बढ़ा दी गई है।
NEET Exam Political Clash : नीट री-टेस्ट से पहले सियासी घमासान, अन्नामलाई ने सरकार पर साधा निशाना











