Ram Mandir Donation Scam : राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी जांच का दायरा और तेज कर दिया है। रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी टिन्नू यादव समेत सभी 8 संदिग्धों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 79 लाख 85 हजार रुपये की नकदी बरामद की है। अयोध्या पुलिस की टीमें न केवल दस्तावेजों की जांच कर रही हैं, बल्कि आरोपियों के परिजनों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही, आरोपियों द्वारा बनाई गई अवैध संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है। इस दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंदानंद सरस्वती द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गंभीर मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की भी संभावना है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी
इस घटना के बाद अब ट्रस्ट के पुनर्गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, 11 जुलाई को अयोध्या में होने वाली ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर मुहर लगने के साथ ही ट्रस्ट के पूरे ढांचे को बदलने की तैयारी है। भविष्य में चढ़ावे की गिनती, प्रबंधन और हिसाब-किताब के लिए पेशेवरों को नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), पूर्व बैंक अधिकारी और मैनेजमेंट ग्रेजुएट शामिल होंगे ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। ट्रस्ट ने अपने सदस्यों से भी सुझाव मांगे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की चूक को पूरी तरह से रोका जा सके।

एसआईटी जांच में सुरक्षा और एसओपी की गंभीर खामियां
विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि दानपात्रों (हुंडियों) की गिनती के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का बिल्कुल पालन नहीं किया गया। सुरक्षा गार्डों की तैनाती, कर्मचारियों की तलाशी और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने जैसे नियमों को ताक पर रख दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज को 180 दिनों के बजाय केवल 45 दिनों तक ही रखा जा रहा था, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है।
चाबियों का दुरुपयोग और गबन का खुला राज
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव (महासचिव चंपत राय के पूर्व चालक) के पास कई दानपात्रों की चाबियां थीं, जिसका उसने दुरुपयोग किया। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की नियुक्ति भी किसी शीर्ष पदाधिकारी की सिफारिश पर की गई थी, जिसने पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया। यह मामला सात जून को तब गरमाया था जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गबन के आरोप लगाए थे। हालांकि, ट्रस्ट ने शुरुआत में इन्हें खारिज किया था, लेकिन अब पुलिसिया कार्रवाई से साफ है कि अनियमितताएं वास्तव में हुई थीं।
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