Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में मिलने वाली नकदी और बहुमूल्य आभूषणों के कथित गबन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर मामले की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि राम मंदिर ट्रस्ट में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी उच्च-स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए। वेणुगोपाल का तर्क है कि यह पूरा प्रकरण न केवल भ्रष्टाचार का मामला है, बल्कि करोड़ों भारतीय नागरिकों की आस्था के साथ एक बड़ा विश्वासघात भी है।

‘संगठित गिरोह’ का आरोप और संस्थागत विफलता
कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कि मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन में भारी चूक हुई है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि मंदिर के भीतर एक ‘संगठित गिरोह’ सक्रिय था, जिसने सुनियोजित तरीके से इस गबन को अंजाम दिया। वेणुगोपाल के अनुसार, यह लूट बिना उच्च-स्तरीय संस्थागत संरक्षण के संभव नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नकदी गिनने वाले कर्मचारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था को दरकिनार कर बेखौफ होकर नकदी और कीमती जेवरात चोरी किए। इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र को छिपाने के लिए सबूतों को मिटा दिया गया, जिसके तहत कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर नष्ट करने का काम किया गया।

चेतावनियों को नजरअंदाज करने का दावा
वेणुगोपाल ने यह भी खुलासा किया कि इस वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं, लेकिन उन्हें या तो दबा दिया गया या पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी ने समय रहते अनियमितताओं को लेकर आगाह किया था। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक की ओर से भी वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिन्हें प्रशासन द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया। कांग्रेस महासचिव ने सवाल उठाया कि जब विश्वसनीय सूत्रों से अनियमितताओं की जानकारी मिल रही थी, तब ट्रस्ट और प्रशासन ने कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी क्यों साधे रखी।
एसआईटी जांच को बताया ‘दिखावा’, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और दर्ज की गई प्राथमिकी को कांग्रेस नेता ने महज ‘दिखावा’ करार दिया है। उनका कहना है कि अब तक की कार्रवाई केवल निचले स्तर के कुछ कर्मचारियों तक ही सीमित रही है, जबकि इस घोटाले में शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं और उन्हें संरक्षण देने वाले प्रभावशाली लोगों पर कोई आंच तक नहीं आई है। वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक सार्वजनिक ट्रस्ट है, जिसका गठन केंद्र सरकार ने किया है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
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