Ram Mandir Donation Scam : राम मंदिर दान घोटाला मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, योगी सरकार ने गठित की एसआईटी

Ram Mandir Donation Scam : अयोध्या के भव्य और ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित चोरी और वित्तीय वित्तीय गड़बड़ियों का गंभीर मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे चुका है। इस संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले पर त्वरित सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत से विशेष गुहार लगाई गई है।

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सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील अनूप अवस्थी ने इस पूरे प्रकरण में न्यायालय से स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने और सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में एक निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने की पुरजोर मांग की है। जनहित में दायर इस याचिका में मामले से जुड़े दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने और राम मंदिर के प्रति देश-विदेश की आम जनता का अटूट भरोसा बनाए रखने के लिए कोर्ट की देखरेख में गहन जांच के कड़े निर्देश देने की अपील की गई है।

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सीजेआई सूर्य कांत की वकीलों को दो टूक: मौखिक नहीं, लिखित में दें नोट

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर की गई मेंशनिंग पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने वकीलों को स्पष्ट हिदायत दी है। सीजेआई ने अदालत कक्ष में मौजूद सभी अधिवक्ताओं से पुरजोर अनुरोध किया है कि वे कोर्ट रूम के भीतर किसी भी केस की मौखिक मेंशनिंग करने से पूरी तरह बचें। सीजेआई सूर्य कांत ने साफ शब्दों में कहा, “मौखिक बहस की जगह पर आप कृपया अपनी बात का एक लिखित नोट जमा करें, इसके बाद हम खुद यह तय करेंगे कि मामले में क्या जरूरी है और क्या नहीं।” उन्होंने अदालत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए आगे कहा कि कोर्ट वर्तमान में जमानत की सभी अर्जियों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवीय अधिकारों से जुड़े अति-महत्वपूर्ण मामलों को सूचीबद्ध (List) करने को प्राथमिकता दे रहा है।

योगी सरकार का बड़ा एक्शन: वित्तीय हेराफेरी की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी गठित

इस पूरे विवाद के राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ने से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शनिवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित गंभीर आरोपों की जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आधिकारिक ऐलान कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, खुद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों पर इस उच्च स्तरीय एसआईटी टीम का गठन किया गया है।

सरकार द्वारा बनाई गई यह विशेष टीम तीर्थ क्षेत्र परिसर में रखे गए दानपात्रों और चढ़ावे के संबंध में सोशल मीडिया व अन्य जगहों पर लगाए जा रहे सभी गंभीर आरोपों की गहराई से निष्पक्ष जांच करेगी और जल्द से जल्द अपनी गोपनीय रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपेगी।

एसआईटी में शामिल हुए दिग्गज अधिकारी: आईएएस और आईपीएस संभालेंगे जांच का जिम्मा

राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस नवगठित एसआईटी टीम में बेहद कड़क और अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस तीन सदस्यीय टीम में वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी और लखनऊ के मौजूदा मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी व पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. और प्रदेश के वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को रखा गया है।

सरकारी बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राम मंदिर के दानपात्रों को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तरह-तरह की अफवाहें तेजी से फैल रही थीं। इस स्थिति को बेहद गंभीरता से लेते हुए, खुद राम मंदिर ट्रस्ट ने मामले की दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली निष्पक्ष जांच के लिए सीएम योगी से एक विशेष जांच दल गठित किए जाने की लिखित गुहार लगाई थी।

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का बयान

योगी सरकार द्वारा एसआईटी (SIT) के आनन-फानन में किए गए गठन पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्र ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। नृपेंद्र मिश्र ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिस त्वरित गति और तत्परता से यह फैसला लिया गया है, वह अपने आप में बेहद सराहनीय और प्रशंसा की बात है। मुझे विश्वस्त सूत्रों से पता लगा है कि एसआईटी की टीम ने शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट करने का समय मांगा है। उस मुलाकात के तत्काल बाद यह टीम अयोध्या आकर अपनी धरातलीय जांच शुरू कर देगी।”

उन्होंने आगे विश्वास जताते हुए कहा, “मैं यह बिल्कुल नहीं समझता कि इस जांच में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही बरती जाएगी। इस पूरे मामले के दो मुख्य पहलू हैं- एक तो इसका आपराधिक पहलू है और दूसरा भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार का पहलू है। जब ये दोनों काम पूरी पारदर्शिता के साथ हो जाएंगे, तब ही हम राम भक्तों और श्रद्धालुओं का खोया हुआ विश्वास दोबारा पूरी तरह से जीत पाएंगे।”

नृपेंद्र मिश्र की सफाई: मेरी भूमिका सिर्फ और सिर्फ निर्माण कार्य तक सीमित

इस कथित महाघोटाले पर बढ़ते भारी राजनीतिक विवाद और तीखे बयानों के बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को मीडिया के सामने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए एक अहम सफाई भी दी। उन्होंने साफ कहा कि राम मंदिर परिसर में उनकी भूमिका सिर्फ और सिर्फ निर्माण कार्य की बारीकी से देखरेख करने तक ही पूरी तरह सीमित है। उन्होंने मंदिर को मिले करोड़ो रुपये के गुप्त दान में कथित हेराफेरी और पैसों के प्रबंधन में गड़बड़ी के इन संगीन आरोपों पर किसी भी प्रकार की सीधी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।

नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को अयोध्या में पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वह केवल निर्माण से जुड़े कार्यों की प्रगति का जायजा लेने के लिए नियमित दौरे पर अयोध्या आए थे। उन्होंने बताया कि उनकी बैठक में केवल मंदिर निर्माण की विभिन्न परियोजनाओं और उनके समयबद्ध पूरा होने पर चर्चा की जाएगी। मंदिर के कथित दान घोटाले पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने संक्षेप में कहा, “मैं सिर्फ निर्माण कार्य देखता हूं, और मेरा किसी अन्य वित्तीय व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है।”

अखिलेश यादव का तीखा हमला

दूसरी तरफ, राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की इस कथित चोरी का यह पूरा मामला देश की सियासत के केंद्र में आ गया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे को लेकर भाजपा और मंदिर प्रशासन पर लगातार हमलावर हैं। अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की भारी-भरकम रकम में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए हैं। सपा प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि यदि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम से जुड़े इतने पवित्र और आस्था के कार्य के लिए दुनिया भर से दिए गए दान और चढ़ावे की चोरी या उसके खुले दुरुपयोग के आरोप सार्वजनिक रूप से लग रहे हैं, तो इन सभी शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सच सामने आना चाहिए।

ट्विटर पर छिड़ा सियासी संग्राम

विपक्षी नेता अखिलेश यादव पिछले कई दिनों से अपने विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स, विशेषकर एक्स (पहले ट्विटर) पर राम मंदिर में चढ़ावे की पवित्र रकम में बड़े पैमाने पर हेरफेर का दावा करते हुए लगातार पोस्ट कर रहे हैं और वह इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। अखिलेश के इन लगातार हमलों पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर तीखा निशाना साधा है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर को लेकर समाज में केवल भ्रम और कोरी अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष राम मंदिर की छवि को धूमिल करने के लिए झूठ की एक नई पटकथा गढ़ने की नाकाम और ओछी कोशिश कर रहा है, जिसे देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

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Chandan Das

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