Ram Mandir Donation Row : अयोध्या में राम मंदिर के दान पात्र से चढ़ावा चोरी और गबन का मामला लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT (विशेष जांच दल) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। बुधवार को पुलिस की टीम अनिल मिश्रा और गोपाल राव से कड़ी पूछताछ करने वाली है। अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि राम मंदिर ट्रस्ट में अनिल मिश्रा की सिफारिश पर ही बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों—लवकुश, अनुकल्प और सुभाष श्रीवास्तव—ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी कर रहे थे।

मिलीभगत का जाल: चाबियों से लेकर सीसीटीवी तक का खेल
आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि मंदिर के काउंटिंग रूम की चाबियों का प्रबंधन पूरी तरह से उनकी मिलीभगत से होता था। एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास। टिन्नू यादव चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है। आरोपियों ने बताया कि वे जानते थे कि सीसीटीवी कैमरे कहाँ लगे हैं, इसलिए वे बहुत सावधानी से इस खेल को अंजाम देते थे। जब कोई व्यक्ति दान के पैसे चुराता था, तो बाकी आरोपी उसे घेरा बनाकर खड़ा कर देते थे ताकि कैमरे में कोई देख न सके। यह ‘चंदा चोर’ नेटवर्क इतने सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था कि लंबे समय तक किसी को भनक तक नहीं लगी।

सिफारिशी भर्तियों और कमीशन की जांच
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि अनिल मिश्रा के माध्यम से लगभग 125 कर्मचारियों ने मंदिर में नौकरी हासिल की थी। इनमें से कई कर्मचारी अनुकल्प और लवकुश जैसे अनिल मिश्रा के करीबी रिश्तेदार थे। SIT अब इस बात की भी जांच कर रही है कि ट्रस्टी बनने के बाद अनिल मिश्रा की संपत्ति में कितनी वृद्धि हुई है और उन पर लगे ‘कमीशन’ लेने के आरोपों की वास्तविकता क्या है। SIT इस पूरे वित्तीय लेनदेन और कमीशनखोरी के नेटवर्क की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसमें अनिल मिश्रा की भूमिका का केंद्र में होना लगभग तय माना जा रहा है।
400 निजी सुरक्षाकर्मी जांच के दायरे में
इस घोटाले ने मंदिर की पूरी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले की जद में मंदिर की सुरक्षा से जुड़े करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी आ गए हैं। SIT उनकी कार्यप्रणाली, तैनाती के रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों की गहन पड़ताल कर रही है। ये सुरक्षाकर्मी मंदिर के प्रवेश और निकास द्वारों तथा दर्शन पथ पर तैनात थे, जहाँ से चढ़ावा ले जाया जाता था। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी संभव थी। मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन अब पूरी भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को फिर से दुरुस्त करने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
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