Ayodhya Ram Mandir scam : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) छह दिनों की गहन छानबीन के बाद शनिवार, 20 जून की देर शाम लखनऊ लौट आई है। सूत्रों के अनुसार, टीम अब इस संवेदनशील मामले में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने की प्रक्रिया में जुट गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार के निर्देश पर गठित यह विशेष टीम अब जल्द ही अपनी निष्कर्षों को सार्वजनिक या उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इस मामले में एसआईटी को कुल 15 दिन का समय दिया गया था, जिसमें से सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश था, जो अब पूरा होने वाला है।

महाकुंभ का चढ़ावा और जांच के मुख्य बिंदु
एसआईटी ने अपनी जांच के दौरान पिछले वर्ष 2025 में आयोजित महाकुंभ के दौरान प्राप्त चढ़ावे पर विशेष रूप से फोकस किया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि जब महाकुंभ के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी, तो क्या चढ़ावे में उसी अनुपात में वृद्धि दर्ज की गई थी या उसमें कोई विसंगति पाई गई है। इसके अलावा, टीम ने भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा के पूर्व और बाद के चढ़ावे के पैटर्न का विस्तृत विश्लेषण किया है। इन आंकड़ों की तुलना से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या चढ़ावे की राशि और आभूषणों के हिसाब-किताब में कोई हेरफेर किया गया है। साथ ही, मंदिर में कार्यरत स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि नियुक्तियों का आधार क्या था।

कर्मचारियों के परिजनों की संपत्ति और रडार पर संदिग्ध
जांच का दायरा काफी व्यापक हो चुका है। एसआईटी अब उन संदिग्ध कर्मचारियों के रिश्तेदारों की आर्थिक स्थिति और उनकी संपत्तियों का ब्योरा खंगाल रही है, जो मंदिर प्रबंधन या सुरक्षा में तैनात थे। आशंका है कि कुछ कर्मचारियों ने अपने परिजनों या रिश्तेदारों के नाम पर बेनामी संपत्ति या व्यापार खड़ा किया हो। एसआईटी ने राम मंदिर परिसर में लंबे समय से सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में लगे लोगों पर पैनी नजर रखी है। इस जांच के दायरे में 100 से अधिक लोग आ चुके हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण नाम भी शामिल हैं।
आभूषणों के मूल्यांकन में हेरफेर की आशंका
एसआईटी की जांच में एक बेहद गंभीर एंगल सामने आया है, जो चढ़ावे में प्राप्त आभूषणों के मूल्यांकन से जुड़ा है। संदेह है कि बहुमूल्य सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को प्राप्त करने के बाद उन्हें कम कीमत का दिखाकर फर्जी पर्चियां तैयार की गईं और वास्तविक मूल्य व दिखाई गई कीमत के बीच के अंतर की राशि को आपस में बांट लिया गया। इस कारण आभूषणों का मूल्यांकन करने वाले कर्मचारी सीधे तौर पर जांच के घेरे में हैं। इस पूरे प्रकरण में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्रा और रामशंकर (टिन्नू यादव) समेत कई प्रमुख लोगों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है, जिससे राज्य की सियासी हलचल तेज हो गई है।
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