Ram Mandir Donation Case : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप सकती है। गौरतलब है कि रविवार शाम को एसआईटी की टीम मुख्यमंत्री से मुलाकात करने पहुंची थी, लेकिन व्यस्तता के कारण यह मुलाकात संभव नहीं हो सकी। सीएम पहले से ही मानसून सत्र की तैयारियों और अन्य उच्च-स्तरीय बैठकों में व्यस्त थे। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं और मंदिर की पवित्रता तथा दान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देशों के मूड में हैं।

150 संदिग्ध और 25 पर कार्रवाई की तलवार
एसआईटी की छह दिनों की गहन जांच के बाद अब मामला निर्णायक मोड़ पर है। टीम ने 7 पेन ड्राइव में महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा सुरक्षित किया है। जांच के दौरान लगभग 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से 25 लोगों पर सीधे कार्रवाई की तलवार लटक रही है। एसआईटी ने उन सभी लोगों को चेतावनी जारी की है जिनसे अब तक पूछताछ की जा चुकी है, कि वे अगले आदेश तक अयोध्या छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे। इस सूची में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा जैसे शीर्ष नाम भी शामिल हैं, जिन्हें अपनी सफाई देनी पड़ सकती है। जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज होने की भी संभावना है, जिसमें 80 से अधिक लोगों को नामजद किया जा सकता है।

सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का गंभीर आरोप
जांच के घेरे में चंपत राय के करीबी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम प्रमुखता से आ रहा है। टिन्नू मंदिर में दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़ा था। उस पर आरोप है कि उसने 8 महीने के सीसीटीवी फुटेज को सोची-समझी साजिश के तहत डिलीट करवाया ताकि गड़बड़ी के सुबूत मिटाए जा सकें। इसके साथ ही, मंदिर कर्मचारी अनुकल्प मिश्रा का नाम भी सामने आया है। माना जा रहा है कि इन लोगों ने मिलीभगत से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और दान पात्रों के प्रबंधन में भारी धांधली की है, जो ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
‘सीता रसोई’ ट्रस्ट और महाकुंभ दान घोटाले का शक
एसआईटी की जांच अब राम मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ‘सीता रसोई’ नामक एक संदिग्ध ट्रस्ट के गठन पर भी पहुंच गई है। टीम को शक है कि इस ट्रस्ट का उपयोग दान की राशि को डायवर्ट करने के लिए किया गया। इसके अलावा, प्रयागराज महाकुंभ के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा लगाए गए कैंपों में भारी मात्रा में दान मिला था, जिसे रिकॉर्ड में काफी कम दिखाया गया। जांच टीम का मानना है कि कई सौ करोड़ रुपये के दान को हेरफेर कर छिपाया गया है। एसआईटी अब यह खंगालने की तैयारी में है कि रामलला के नाम पर और कितने फर्जी ट्रस्ट चलाए जा रहे हैं।
राजनीतिक घमासान और CBI जांच की मांग
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया था कि मंदिर से 5 से 7 करोड़ रुपये की चोरी हुई है, जिसके बाद अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की। पीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट तलब की है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाने वाली एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने लाएगी।
Petrol Diesel Price : होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल में उछाल, जानें पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट










