Ram Mandir Donation Scam : अयोध्या के राम मंदिर में हुए कथित चंदा चोरी के मामले ने देश की राजनीति को गरमा दिया है। अब इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार के मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जब मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और उद्घाटन का श्रेय लेने की बात आती है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जब मंदिर में भ्रष्टाचार और चोरी जैसे संवेदनशील मुद्दे सामने आते हैं, तब उनकी चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री इस मामले पर अपनी ‘मन की बात’ जनता के सामने कब रखेंगे?

योगी सरकार से तीखे सवाल: कौन है जिम्मेदार?
प्रियांक खरगे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयानों पर भी पलटवार किया। मुख्यमंत्री द्वारा यह कहे जाने पर कि ‘राम भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ न करें’, खरगे ने सवाल उठाया कि आखिर भावनाओं के साथ असली खिलवाड़ किसने किया? उन्होंने स्पष्ट रूप से पूछा कि इस गबन के मामले में क्या कांग्रेस या समाजवादी पार्टी का कोई नेता शामिल है? उनका आरोप है कि इस पूरी साजिश में बीजेपी से जुड़े और उन्हीं के ‘अपने लोग’ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जो खुद मंदिर की सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखने में नाकाम रहे, उन्हें दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

‘राम के नाम पर लूट’: आस्था की रक्षा में भाजपा की नाकामी
कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला जारी रखते हुए कहा कि बीजेपी ने राम के नाम का इस्तेमाल केवल राजनीति चमकाने के लिए किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के लोगों ने राम के नाम पर लूट-खसोट की है और लोगों की आस्था को धोखा दिया है। प्रियांक खरगे ने कहा कि दो हफ्तों से वे लगातार यह बात कह रहे हैं कि ये लोग धर्म की आड़ में राजनीति करते हैं और इनसे किसी भी सकारात्मक या ईमानदार कार्य की उम्मीद करना व्यर्थ है। उनके अनुसार, भाजपा की कार्यशैली ने श्रद्धालुओं के विश्वास को गहरा धक्का पहुँचाया है।
मामले में जारी है कार्रवाई: आठ आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
राम मंदिर चंदा चोरी का यह विवाद देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार की ओर से इस मामले में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस गबन के मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता और पारदर्शिता के लिए उठाई गई एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पारदर्शिता का संकट और भविष्य की चुनौतियां
यह पूरा घटनाक्रम धार्मिक आस्था और वित्तीय पारदर्शिता के बीच के नाजुक संतुलन को उजागर करता है। जब करोड़ों लोगों का दान मंदिर में जाता है, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसआईटी की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और क्या इस मामले में संलिप्त अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा। विपक्षी दलों का आक्रामक रुख यह स्पष्ट करता है कि आगामी दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ेगा, जिससे सरकार के लिए जवाबदेही तय करना और भी जरूरी हो गया है।
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