Ramadan Calendar 2026
Ramadan Calendar 2026: इस्लामी कैलेंडर के नौवें और सबसे पवित्र महीने, ‘रमजान-उल-मुबारक’ का आज से विधिवत शुभारंभ हो गया है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह महीना आत्म-शुद्धि, धैर्य और खुदा की इबादत का प्रतीक माना जाता है। रमजान के दौरान दुनिया भर के मुसलमान सूर्योदय से पूर्व ‘सहरी’ खाकर रोजा रखते हैं और सूर्यास्त के समय ‘इफ्तार’ के साथ अपना व्रत खोलते हैं। यह महीना केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह कुरान की तिलावत, पांच वक्त की नमाज और नेक राह पर चलने का संकल्प लेने का समय है। माना जाता है कि इस पाक महीने में की गई हर दुआ कुबूल होती है और नेक कार्यों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
इस्लामी परंपरा के अनुसार, रमजान की शुरुआत चांद देखने पर निर्भर करती है। बीते बुधवार की शाम को भारत के विभिन्न हिस्सों में चांद का दीदार हुआ, जिसके बाद तरावीह की नमाज शुरू हुई और आज, यानी 19 फरवरी 2026 को देश में पहला रोजा रखा जा रहा है। रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें ‘अशरा’ कहा जाता है। पहले 10 दिन रहमत (दया), अगले 10 दिन मगफिरत (क्षमा) और अंतिम 10 दिन जहन्नुम से निजात (मुक्ति) के होते हैं। सहरी और इफ्तार का समय प्रतिदिन सूर्य की गति के अनुसार बदलता रहता है, इसलिए सही समय का पालन करना रोजेदारों के लिए अनिवार्य है।
रोजेदारों की सुविधा के लिए यहाँ रमजान 2026 का विस्तृत कैलेंडर और समय सारिणी दी गई है। यह समय सूर्योदय और सूर्यास्त के मानकों पर आधारित है:
| रोजा संख्या | तारीख (2026) | सहरी (AM) | इफ्तार (PM) |
| 01 | 19 फरवरी | 05:37 AM | 06:14 PM |
| 02 | 20 फरवरी | 05:36 AM | 06:15 PM |
| 03 | 21 फरवरी | 05:35 AM | 06:15 PM |
| 04 | 22 फरवरी | 05:35 AM | 06:16 PM |
| 05 | 23 फरवरी | 05:34 AM | 06:17 PM |
| 06 | 24 फरवरी | 05:33 AM | 06:17 PM |
| 07 | 25 फरवरी | 05:32 AM | 06:18 PM |
| 08 | 26 फरवरी | 05:31 AM | 06:19 PM |
| 09 | 27 फरवरी | 05:30 AM | 06:19 PM |
| 10 | 28 फरवरी | 05:29 AM | 06:20 PM |
| 11 | 01 मार्च | 05:28 AM | 06:21 PM |
| 15 | 05 मार्च | 05:24 AM | 06:23 PM |
| 20 | 10 मार्च | 05:19 AM | 06:26 PM |
| 25 | 15 मार्च | 05:13 AM | 06:29 PM |
| 29 | 19 मार्च | 05:08 AM | 06:32 PM |
सहरी और इफ्तार केवल भोजन करने का समय नहीं हैं, बल्कि इनके साथ गहरी धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। सहरी करना ‘सुन्नत’ माना जाता है, जो रोजेदार को दिन भर की इबादत के लिए ऊर्जा प्रदान करती है। वहीं इफ्तार के समय पूरा परिवार एक साथ बैठकर खुदा का शुक्र अदा करता है। खजूर से रोजा खोलना सुन्नत है, क्योंकि खजूर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। रोजेदारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर के स्थानीय समय के अनुसार ही सहरी खत्म करें और इफ्तार करें, क्योंकि अलग-अलग शहरों के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
रमजान का महीना सामाजिक समानता का संदेश देता है। इस महीने में ‘जकात’ (अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा दान करना) और ‘फितरा’ देने का विशेष महत्व है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी अपनी खुशियां मना सकें। लोग मस्जिदों में सामूहिक नमाज और विशेष ‘तरावीह’ का आयोजन करते हैं। यह महीना हमें सिखाता है कि किस प्रकार अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाकर हम आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त कर सकते हैं। 29 या 30 रोजों के बाद, चांद दिखने पर ‘ईदुल फित्र’ का त्योहार मनाया जाएगा।
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