Oplus_16908288
Ambikapur News : सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लॉक में स्थित ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक धरोहर रामगढ़ को बचाने की मुहिम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन संरक्षण प्रभाग ने गंभीर पहल की है। मंत्रालय ने राज्य सरकार के प्रमुख सचिव, वन विभाग को पत्र लिखकर मामले की जांच और न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उदयपुर ब्लॉक की यह पहाड़ी न केवल पुरातात्विक धरोहर है, बल्कि धार्मिक मान्यता से भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान कुछ समय यहां रुके थे। पहाड़ी पर प्राचीन श्रीराम-जानकी मंदिर है और नीचे के हिस्से में विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला मानी जाने वाली गुफा है। लेकिन बीते वर्षों में आसपास बढ़ते कोल खनन ने इस धरोहर को खतरे में डाल दिया है। चल रहे विस्फोटों से पहाड़ी में दरारें तक देखी गई हैं, जिसने स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों की चिंताएं गहरा दी हैं।
रामगढ़ की इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सिंहदेव ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि इस क्षेत्र को कोल खनन से पूरी तरह सुरक्षित किया जाए। उनके पत्र का संज्ञान लेते हुए मंत्रालय ने राज्य सरकार को कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने खनन पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार को इस क्षेत्र का जैव विविधता मूल्यांकन कराने को कहा था।
2019 में कांग्रेस सरकार ने वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और आईसीएफआरई देहरादून से अध्ययन शुरू कराया।
2021 की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि पूर्व से संचालित खदान क्रमांक 14 (पीईकेबी) को छोड़कर बाकी सभी खदानों को नो-गो (खननविहीन) घोषित किया जाए।
2024 में नई खदान क्रमांक 12 (केते एक्सटेंशन) के लिए जनसुनवाई हुई, जिसमें 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुईं।
जून 2025 में वन विभाग की रिपोर्ट आई, लेकिन उसमें रामगढ़ मंदिर और पहाड़ी पर पड़ रहे वास्तविक खतरों का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
मार्च 2025 में जारी अध्ययन में पाया गया कि 2000 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव संघर्ष से 737 मौतें हुईं, जिनमें से 75 प्रतिशत उत्तर छत्तीसगढ़ में थीं। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि हाथियों के प्राकृतिक आवास और प्रभावित हुए, तो संघर्ष और बढ़ेगा, जिसका समाधान लगभग असंभव होगा।
26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव क्षेत्र की सभी नई कोल खदानों को रद्द करने की मांग की थी। यहां तक कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के विधायकों ने इसका समर्थन किया।
नई खदान क्रमांक 12 के लिए प्रस्तावित क्षेत्र 99 प्रतिशत घना वन है। यहां लगभग साढ़े चार लाख बड़े वृक्षों और लाखों छोटे पौधों की कटाई होनी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई असंभव होगी।
टी.एस. सिंहदेव की पहल और केंद्र मंत्रालय के हस्तक्षेप से अब रामगढ़ संरक्षण की लड़ाई को नई दिशा मिलती दिख रही है। स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों को उम्मीद है कि सरकार समय रहते निर्णायक कदम उठाएगी और रामगढ़ की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेगी।
Kanker Crime News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक उच्च स्तरीय राजनीतिक और आपराधिक विवाद…
Raipur Crime: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मानवता को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला…
Iran War 2026: मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप…
IPL 2026 RR vs CSK: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का आगाज चेन्नई…
IPL 2026 RR vs CSK: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांचक मुकाबले में राजस्थान…
Chhattisgarh Police Promotion: छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग ने पुलिस प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त बनाने की…
This website uses cookies.