Ranveer Marhas Resignation
Ranveer Marhas Resignation: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर स्थित हाई कोर्ट से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार के विधिक मोर्चे पर तैनात सबसे महत्वपूर्ण इकाई, महाधिवक्ता कार्यालय (Advocate General Office) में बड़े बदलाव की लहर चल पड़ी है। महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत के पद छोड़ने के कुछ ही समय बाद अब अतिरिक्त महाधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इन वरिष्ठ विधिक अधिकारियों के अचानक हटने से राज्य की कानूनी व्यवस्था और शासन के विधिक प्रबंधन में बड़े सुधारों (Reforms) के संकेत मिल रहे हैं।
पिछले करीब दो वर्षों का समय छत्तीसगढ़ सरकार के लिए विधिक दृष्टिकोण से काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। बिलासपुर उच्च न्यायालय में कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में राज्य शासन को विधिक झटके झेलने पड़े। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि कुछ मामलों में सरकार को अपने पूर्व में लिए गए निर्णयों को वापस लेना पड़ा, तो कई मामलों में नियमों और अधिनियमों के प्रावधानों में संशोधन करने की नौबत आ गई। कानूनी लड़ाई में सरकार की इस कमजोर स्थिति को लेकर शासन के उच्च स्तर पर महाधिवक्ता कार्यालय के प्रदर्शन के प्रति असंतोष पनप रहा था, जो अब इस्तीफों के रूप में सामने आ रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत के इस्तीफे से हुई, जिसने कानूनी गलियारों में सबको चौंका दिया था। हालांकि, जानकार इसे सरकार की नई रणनीति का हिस्सा मान रहे थे। महाधिवक्ता के जाने के लगभग एक महीने बाद, अतिरिक्त महाधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास ने भी अपना त्यागपत्र विधि विधायी विभाग के सचिव को भेज दिया है। मरहास ने अपने कार्यकाल के दौरान कई जटिल मामलों में सरकार का पक्ष रखा था, लेकिन अब उनके इस्तीफे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाधिवक्ता कार्यालय की पूरी टीम में आमूल-चूल परिवर्तन होने वाला है।
एक रोचक तथ्य यह है कि न तो प्रफुल्ल भारत और न ही रणवीर सिंह मरहास ने अपने त्यागपत्र में किसी विशिष्ट कारण का जिक्र किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के इस्तीफे का मजमून लगभग एक जैसा है, जो यह दर्शाता है कि यह किसी व्यक्तिगत विवाद के बजाय एक संस्थागत परिवर्तन का हिस्सा है। जब किसी कार्यालय के शीर्ष अधिकारी बिना किसी कारण के पद छोड़ते हैं, तो इसे प्रशासनिक भाषा में ‘नई नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करना’ माना जाता है। इससे यह चर्चा तेज है कि सरकार अब नई टीम के साथ अदालत में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।
रणवीर सिंह मरहास ने अपने विदाई पत्र में एक गरिमामय रुख अपनाया है। उन्होंने लिखा कि पिछले दो वर्षों तक अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में राज्य की सेवा करना उनके लिए गौरवपूर्ण रहा। उन्होंने विभिन्न अदालतों में छत्तीसगढ़ शासन का प्रतिनिधित्व करने और विधिक मामलों में योगदान देने के अवसर के लिए सरकार का धन्यवाद किया। मरहास ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी पूरी क्षमता के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पद से हटना ही उनके लिए उचित समय है।
दो शीर्ष अधिकारियों के हटने के बाद अब महाधिवक्ता कार्यालय में अन्य कनिष्ठ विधि अधिकारियों और सरकारी वकीलों की सूची में भी बदलाव की संभावना प्रबल हो गई है। राज्य सरकार संभवतः ऐसे चेहरों की तलाश में है जो कोर्ट में शासन के पक्ष को और अधिक मजबूती और बारीकी से रख सकें। आने वाले दिनों में नए महाधिवक्ता और उनकी नई टीम की घोषणा की जा सकती है। फिलहाल, इन इस्तीफों ने प्रदेश की राजनीतिक और विधिक व्यवस्था के बीच सामंजस्य और सुधार की एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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