CJP के विरोध प्रदर्शनों के बीच रवि किशन ने Gen Z को भारत की आत्मा बताया और जंतर-मंतर आंदोलन से अलग राय रखी। उन्होंने युवाओं को देशभक्त और जागरूक कहा। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब CJP चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठा रही है।
CJP के विरोध प्रदर्शनों के बीच रवि किशन ने Gen Z को भारत की आत्मा बताया और जंतर-मंतर आंदोलन से अलग राय रखी। उन्होंने युवाओं को देशभक्त और जागरूक कहा। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब CJP चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठा रही है।

Ravi Kishan News : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन ने जेन Z यानी युवा पीढ़ी को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने युवाओं को देशभक्त, जागरूक और देश के भविष्य का नेतृत्व करने में सक्षम बताया। रवि किशन ने कहा कि जेन Z भारत की आत्मा है और आने वाले वर्षों में यही पीढ़ी देश की जिम्मेदारी संभालेगी। उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब CJP चुनावी प्रक्रिया और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।

रवि किशन ने मुंबई में आयोजित ‘खिड़कियां थिएटर फिल्म फेस्टिवल 2026’ के दौरान ये बातें कहीं। इस कार्यक्रम में वह बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ मौजूद थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जेन Z के युवाओं में उन्हें अपनी झलक दिखाई देती है। उनके मुताबिक, नई पीढ़ी अपने विचारों को लेकर सजग है और उसे किसी के निर्देशों के आधार पर अपनी राय बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों से युवाओं पर अपने विचार थोपने से बचने की अपील भी की।

रवि किशन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को जेन Z की सामान्य सोच से अलग बताया। उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है, उसका पूरी युवा पीढ़ी से संबंध नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भाजपा सांसद के मुताबिक, आज के युवा देश के साथ खड़े हैं और उनमें राष्ट्रीय मुद्दों को समझने की क्षमता है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यही पीढ़ी देश का नेतृत्व करेगी। हालांकि, यह रवि किशन की व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है और इससे सभी युवाओं की राय का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
CJP के आंदोलन की शुरुआत 6 जून को NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हुई थी। संगठन ने जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। इसके बाद आंदोलन तेज हुआ और 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा से जुड़े विवाद पर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पुलिस बैरिकेडिंग और बल प्रयोग को लेकर भी विवाद सामने आया। दिए गए विवरण के अनुसार, 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की प्रमुख मांग से जोड़कर देखा गया।
कुछ महीनों बाद CJP ने चुनावी गड़बड़ियों और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर नया आंदोलन शुरू किया। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इस तरह संगठन का फोकस परीक्षा विवाद से बदलकर चुनावी जवाबदेही पर आ गया। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और मांगों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

CJP को युवा मुद्दों पर सक्रिय दबाव समूह के रूप में देखा जाता है। हालांकि, रवि किशन ने जेन Z को संगठन और जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शनों से अलग बताया। उनके बयान ने युवा पीढ़ी की राजनीतिक भागीदारी, देशभक्ति और लोकतांत्रिक आंदोलनों में उसकी भूमिका को लेकर चर्चा को फिर सामने ला दिया है।
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