RBI MPC Meeting
RBI MPC Meeting : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को संपन्न हो गई। बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने मुख्य ब्याज दर यानी ‘रेपो रेट’ को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। आम आदमी के लिए इसका सीधा और सकारात्मक मतलब यह है कि उनके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तें (EMI) फिलहाल नहीं बढ़ेंगी। बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने पहले ही इस बात का अनुमान लगाया था कि वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
बुधवार सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने ‘तटस्थ रुख’ (Neutral Stance) को बरकरार रखने का फैसला किया है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि तमाम वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारत की विकास दर (Growth Outlook) सकारात्मक बनी हुई है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि घरेलू महंगाई के आंकड़े अब धीरे-धीरे राहत दे रहे हैं, हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर बैंक की पैनी नजर बनी हुई है।
नए वित्त वर्ष की इस पहली एमपीसी बैठक में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से दरों को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्जदारों को राहत देने के लिए ब्याज दरों में उल्लेखनीय कटौती की है। फरवरी 2024 से लेकर अब तक आरबीआई ने कुल 125 बेसिस पॉइंट (आधार अंक) की कटौती दर्ज की है। ब्याज दरों में आखिरी बड़ी कटौती दिसंबर 2025 में की गई थी, जिसके बाद से दरों को एक स्थिर स्तर पर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है ताकि विकास और महंगाई के बीच संतुलन बना रहे।
खुदरा महंगाई (CPI) को लेकर आरबीआई ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। एमपीसी के सदस्यों का मानना है कि हालांकि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ‘अपसाइड रिस्क’ यानी कीमतों के दोबारा बढ़ने का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान लगाया गया है। तिमाही आधार पर आंकड़ों को देखें तो पहली तिमाही (Q1) में इसके 4%, दूसरी (Q2) में 4.4%, तीसरी (Q3) में 4.2% और चौथी तिमाही (Q4) में 4.7% रहने की संभावना जताई गई है। आरबीआई का लक्ष्य महंगाई को 4% के आदर्श स्तर के करीब लाना है।
आरबीआई के इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर और रियल एस्टेट बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट को स्थिर रखकर आरबीआई ने यह संकेत दिया है कि वह आर्थिक विकास की रफ्तार को कम नहीं होने देना चाहता। निवेशकों के लिए भी यह एक सकारात्मक संदेश है कि भारतीय बाजार स्थिर कूटनीतिक और आर्थिक नीतियों के साथ आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यदि महंगाई के आंकड़े और अधिक अनुकूल होते हैं, तो भविष्य की बैठकों में दरों में और अधिक कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, मध्यम वर्ग के लिए राहत की बात यही है कि उनकी जेब पर अतिरिक्त ब्याज का बोझ नहीं पड़ने वाला है।
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