Reliance Industries
Reliance Industries : मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने भारतीय व्यापार जगत में एक ऐसा मील का पत्थर स्थापित किया है, जिसे छूना अन्य कंपनियों के लिए फिलहाल एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि रिलायंस केवल भारत की सबसे बड़ी कंपनी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर मुनाफे के नए प्रतिमान गढ़ रही है। कंपनी ने इस वित्त वर्ष में ₹95,610 करोड़ का शुद्ध लाभ (Net Profit) अर्जित किया है, जो भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस साल एक विशेष उपलब्धि हासिल की है। कंपनी अब दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है जो सालाना $10 बिलियन (लगभग ₹84,000 करोड़) से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाती हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का मुनाफा ₹80,787 करोड़ था, जिसमें इस साल 18% की प्रभावशाली वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी की रणनीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में किया गया निवेश अब ठोस परिणाम दे रहा है।
मुनाफे के साथ-साथ रिलायंस ने राजस्व (Revenue) के मामले में भी अपनी बादशाहत कायम रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल टर्नओवर ₹11,75,919 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, कंपनी का EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) भी ₹2,07,911 करोड़ दर्ज किया गया, जो कंपनी की परिचालन दक्षता और मजबूत कैश फ्लो का प्रमाण है। मुकेश अंबानी के विजन ने रिलायंस को एक पारंपरिक ऊर्जा कंपनी से बदलकर एक डाइवर्सिफाइड कंज्यूमर और टेक्नोलॉजी दिग्गज बना दिया है।
रिलायंस की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उसके कंज्यूमर बिजनेस—जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल—का सबसे बड़ा हाथ है। जहां एक ओर जियो ने अपनी डिजिटल सेवाओं और डेटा क्रांति के जरिए करोड़ों ग्राहकों को जोड़े रखा, वहीं दूसरी ओर रिलायंस रिटेल ने देश भर में अपनी पैठ मजबूत की है। रिलायंस रिटेल ने अब 20,000 स्टोर्स का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जो इसे वैश्विक स्तर के रिटेल दिग्गजों की कतार में खड़ा करता है। इन दोनों ही क्षेत्रों ने कंपनी की कमाई में स्थिरता और निरंतरता प्रदान की है।
हालांकि, पूरे साल के शानदार प्रदर्शन के बावजूद मार्च 2026 में समाप्त हुई चौथी तिमाही में मुनाफे में थोड़ी नरमी देखी गई। इस तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹16,971 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि (₹19,407 करोड़) के मुकाबले कम है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के पारंपरिक ‘ऑयल-टू-केमिकल्स’ (O2C) सेगमेंट में कच्चे माल की बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार में मार्जिन का कम होना है। इसके बावजूद, रिलायंस का समग्र प्रदर्शन संतुलित और सकारात्मक बना हुआ है।
शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज की धमक बरकरार है। ₹18 लाख करोड़ से अधिक के मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-Cap) के साथ यह भारतीय शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। एचडीएफसी बैंक, टीसीएस और एसबीआई जैसे दिग्गज संस्थान बाजार मूल्य के मामले में रिलायंस से काफी पीछे हैं। मुकेश अंबानी का लक्ष्य अब रिलायंस को ‘नेट कार्बन जीरो’ बनाने के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व करने की ओर है, जो भविष्य में कंपनी के मुनाफे को और अधिक ऊंचाई पर ले जा सकता है।
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