RG Kar Medical College Case : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्याकांड मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने इस पूरे मामले की नए सिरे से दोबारा जांच कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसी कड़ी में सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के आला अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम आरजी कर मेडिकल कॉलेज पहुंची और सीधे प्रिंसिपल के दफ्तर में दाखिल हुई। मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष टीम में जॉइंट डायरेक्टर स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी सहित कुल छह अधिकारी शामिल हैं, जो मामले से जुड़े हर पहलू को खंगाल रहे हैं।

अपराध स्थल का पुनरीक्षण करेगी टीम, अधिकारियों और गवाहों से होगी सीधी पूछताछ
सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि एजेंसी की यह विशेष टीम अस्पताल के वर्तमान प्रिंसिपल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, वाइस प्रिंसिपल समेत कई अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से आमने-सामने मुलाकात कर रही है। इसके साथ ही, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह टीम अस्पताल के उस सेमिनार रूम या संवेदनशील स्थान का भी बारीक निरीक्षण कर सकती है, जहां इस रोंगटे खड़े कर देने वाले अपराध को अंजाम दिया गया था। सरकार और अदालत दोनों ही इस मामले में किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने की पीड़िता के माता-पिता के साथ लंबी भावुक बैठक
इस री-ओपनिंग से ठीक एक हफ्ते पहले पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने एक बड़ा आधिकारिक ऐलान किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राज्य सरकार ने आरजी कर मामले से जुड़ी तमाम पुरानी और बंद फाइलों को दोबारा खोलने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्व की जांच में सामने आईं गंभीर कमियों और गड़बड़ियों को लेकर मृतका के माता-पिता की चिंताओं को दूर करने के लिए उनके साथ करीब डेढ़ घंटे तक एक बेहद भावुक और महत्वपूर्ण बैठक भी की थी। सरकार ने पीड़िता के परिवार को आश्वस्त किया है कि इस बार न्याय प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं होगी।
साल 2024 की वो खौफनाक वारदात, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में नाइट ड्यूटी पर तैनात एक युवा महिला ट्रेनी डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दिल दहला देने वाली घटना के सामने आने के बाद न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे देश की जनता और चिकित्सा जगत का आक्रोश फूट पड़ा था। देश के कोने-कोने में हफ़्तों तक उग्र विरोध प्रदर्शन और डॉक्टरों की हड़तालें हुईं थीं। उस दौरान तत्कालीन प्रशासन पर घटना से जुड़े अहम सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने, फोरेंसिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और पूरे मामले को रफा-दफा करने के बेहद संगीन आरोप भी लगे थे।
कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त निर्देश, टाइमलाइन की नए सिरे से होगी गहन तफ्तीश
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने पिछले महीने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की नए सिरे से (डी-नोवो) जांच करने का सख्त आदेश जारी किया। माननीय उच्च न्यायालय ने सीबीआई को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह घटना वाली रात पीड़िता के अंतिम बार खाना खाने के समय से लेकर, अगले दिन शाम को उनके अंतिम संस्कार किए जाने तक की पूरी घटनाक्रम की श्रृंखला (क्रोनोलॉजी) की परत-दर-परत दोबारा बारीकी से जांच करे। अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को यह खुली छूट और अधिकार भी दिया है कि सच का पता लगाने के लिए वे जरूरत पड़ने पर किसी भी रसूखदार व्यक्ति या गवाह को समन भेजकर कड़ी पूछताछ कर सकती है।
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