RG Kar Medical College Case
RG Kar Medical College Case : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर मामले में एक बार फिर बड़ी कानूनी हलचल शुरू हो गई है। कलकत्ता उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने इस संवेदनशील मामले को कथित रूप से दबाने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोपों की गहन जांच का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। अदालत ने इस मामले की निष्पक्ष तफ्तीश के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो () की एक 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम () गठित करने का निर्देश दिया है। इस नवगठित एसआईटी की कमान सीबीआई के पूर्वी क्षेत्र के जॉइंट डायरेक्टर (संयुक्त निदेशक) संभालेंगे। हाई कोर्ट ने इस विशेष टीम को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 25 जून तक का समय निर्धारित किया है।
उच्च न्यायालय ने सीबीआई को आदेश दिया है कि वह उस खौफनाक रात के पूरे घटनाक्रम की नए सिरे से कड़ियों को जोड़कर दोबारा बारीकी से जांच करे। साथ ही, अदालत ने जांच एजेंसी को पूरी स्वतंत्रता देते हुए जरूरत पड़ने पर किसी भी संदिग्ध या रसूखदार व्यक्ति से पूछताछ करने की खुली अनुमति दी है। कोर्ट का यह आदेश पीड़िता के माता-पिता द्वारा दायर की गई एक विशेष याचिका पर आया है। पिछले साल 17 मार्च को पैरेंट्स ने सीबीआई पर केस की सही ढंग से जांच न करने और पर्दे के पीछे से मामले को दबाने का सीधा आरोप लगाया था। इस मामले में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने पीड़ित परिवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका लगाने की अनुमति दी थी।
याद दिला दें कि आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त 2024 की दरम्यानी रात एक जूनियर ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ बर्बरतापूर्वक रेप और मर्डर की वारदात को अंजाम दिया गया था। अगले दिन 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल से बरामद हुआ था। इस मामले में सियालदह कोर्ट (सेशंस कोर्ट) में 12 नवंबर 2024 को केस का स्पीडी ट्रायल शुरू हुआ था और महज 57 दिनों की अदालती कार्यवाही के बाद 20 जनवरी 2025 को मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सख्त सजा सुनाई गई थी। इस मामले में एक और बड़ा मोड़ यह आया है कि पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ अब राजनीति में कदम रख चुकी हैं और वे पानीहाटी सीट से भाजपा () की विधायक चुनी गई हैं।
कोलकाता पुलिस की टास्क फोर्स ने घटना के बाद सक्रियता दिखाते हुए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वारदात के मुख्य आरोपी व सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को 10 अगस्त को ही गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस को घटना स्थल (सेमीनार हॉल) से एक टूटा हुआ ब्लूटूथ इयरफोन मिला था, जो तकनीकी जांच के दौरान सीधे संजय रॉय के मोबाइल फोन से कनेक्ट पाया गया। इसके अलावा, आरोपी की जींस पैंट और जूतों पर पीड़िता के खून के धब्बे मिले थे। सबसे पुख्ता सबूत के तौर पर संजय का डीएनए () मौके से बरामद साक्ष्यों से पूरी तरह मैच हो गया था। आरोपी के शरीर पर चोट के 5 निशान भी मिले थे, जो पीड़िता द्वारा आत्मरक्षा में किए गए संघर्ष को साबित करते थे।
इस खौफनाक वारदात के विरोध में कोलकाता सहित पूरे देश में डॉक्टरों और आम नागरिकों के गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा था। पश्चिम बंगाल में दो महीने से भी अधिक समय तक डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप रही थीं। मामले में आरजी कर कॉलेज के पूर्व विवादित प्रिंसिपल संदीप घोष को भी मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में आरोपी बनाया गया था। लेकिन सीबीआई द्वारा 90 दिनों के भीतर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल न कर पाने के कारण तकनीकी आधार पर सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को घोष को जमानत दे दी थी, हालांकि वे भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में अब भी जेल में बंद हैं। इस मामले में सीबीआई ने कई आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था।
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