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Road Safety: गडकरी का बड़ा फैसला, अब सिर्फ मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी सुरक्षित स्लीपर बसें

Road Safety: भारत में सड़क सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कई बड़े बदलावों की घोषणा की। स्लीपर कोच बसों में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अब इनके निर्माण और सुरक्षा मानकों के लिए कड़े नियम लागू करने का निर्णय लिया है।

केवल अधिकृत कंपनियां ही कर सकेंगी स्लीपर बसों का निर्माण

स्लीपर कोच बसों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सबसे बड़ा कदम इनके निर्माण प्रक्रिया पर उठाया है। नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल सरकार से मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र द्वारा प्रमाणित सुविधाओं के माध्यम से ही किया जा सकेगा। अब तक कई निजी वर्कशॉप्स में मानकों की अनदेखी कर बसों की बॉडी बनाई जाती थी, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता था। इस नए नियम का उद्देश्य निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षा को पुख्ता करना है ताकि किसी भी तरह की तकनीकी खामी की गुंजाइश न रहे।

इन सुरक्षा फीचर्स के बिना नहीं चलेंगी स्लीपर बसें

सड़क परिवहन मंत्री ने बसों में अनिवार्य रूप से लगाए जाने वाले सुरक्षा उपकरणों की एक लंबी सूची जारी की है। अब सभी स्लीपर कोच बसों में ‘फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम’ (FDAS) और इमरजेंसी लाइटिंग होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, एक नई तकनीक के तौर पर ‘ड्राइवर फटीग इंडिकेटर’ भी लगाया जाएगा, जो ड्राइवर को नींद आने की स्थिति में अलर्ट कर देगा। यात्रियों की जान बचाने के लिए बसों में पर्याप्त मात्रा में इमरजेंसी एग्जिट द्वार और कांच तोड़ने के लिए विशेष हथौड़े (Safety Hammers) होना भी सुनिश्चित किया गया है।

AIS-052 नेशनल स्टैंडर्ड का पालन करना होगा जरूरी

सुरक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए सभी स्लीपर कोच बसों को अब ‘AIS-052 बस बॉडी कोड’ का पालन करना होगा। यह एक अनिवार्य राष्ट्रीय मानक है जो बस की संरचनात्मक मजबूती, डिजाइन और सुरक्षा आवश्यकताओं को निर्धारित करता है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि इस कोड का पालन करने से यह सुनिश्चित होगा कि भारत में चलने वाली सभी बसें यात्रियों के लिए एक सुरक्षित कवच की तरह काम करेंगी। यह मानक बसों की पलटने की स्थिति में मजबूती और आग के प्रति प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा।

भीषण हादसों के बाद सरकार ने दिखाई सख्ती

पिछले छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि स्लीपर कोच बसों में आग लगने की छह बड़ी घटनाओं में 145 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इन हादसों की जांच में पाया गया कि अधिकांश बसों में इमरजेंसी खिड़कियां या तो जाम थीं या गायब थीं। साथ ही, आग बुझाने वाले उपकरणों का अभाव था और बस कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति से निपटने का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। इन दुखद घटनाओं ने सरकार को कड़े नीतिगत बदलाव करने के लिए मजबूर किया है, ताकि भविष्य में मासूम जिंदगियों को बचाया जा सके।

दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज और V2V तकनीक

नितिन गडकरी ने यात्रियों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी साझा की। प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट’ योजना शुरू करेंगे। इसके तहत पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। साथ ही, पीड़ितों की मदद करने वाले ‘नेक फरिश्तों’ को नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। भविष्य की तकनीक पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ‘वाहन-से-वाहन’ (V2V) संचार तकनीक पर काम कर रही है। इस तकनीक के जरिए गाड़ियाँ आपस में संवाद कर सकेंगी, जिससे ड्राइवर को सामने वाले वाहन की गति और ब्रेक के बारे में रीयल-टाइम अलर्ट मिलेगा और हादसों में भारी कमी आएगी।

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