Russia earthquake 2025 : रूस के कामचटका प्रायद्वीप में शनिवार को भयानक भूकंप ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच केवल 45 मिनट के भीतर चार शक्तिशाली झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6 से 7.4 के बीच दर्ज की गई। इन भूकंपों के बाद प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई है।
सभी भूकंप कामचटका के पूर्वी तट से समुद्र के भीतर आए। भूकंप का केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की शहर से 144 किलोमीटर पूर्व में और समुद्र के 20 किलोमीटर नीचे स्थित था। इससे पूरे इलाके में तेज झटके महसूस हुए। लोगों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जर्मनी के जियोसाइंस रिसर्च सेंटर (GFZ) और भारत के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) ने भूकंप की पुष्टि की है।
पहला झटका दोपहर 12:19 बजे आया, जिसकी तीव्रता 7.4 रही।
दूसरा 12:37 बजे 6.6 तीव्रता के साथ आया।
तीसरा झटका 12:52 बजे महसूस हुआ, जिसकी तीव्रता 6.4 रही।
चौथा और अंतिम झटका 12:56 बजे 6.0 तीव्रता का था।
भूकंप के झटकों के तुरंत बाद, कामचटका के शिवेलुच ज्वालामुखी में जबरदस्त विस्फोट हुआ। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, ज्वालामुखी से निकलता लावा और राख का घना बादल कई किलोमीटर ऊंचाई तक फैल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्फोट भूकंप के दबाव का ही परिणाम हो सकता है।
भूकंपों की तीव्रता और समुद्र के भीतर उनके केंद्र को देखते हुए सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, अब तक प्रशांत महासागर में किसी तरह की सुनामी लहर दर्ज नहीं की गई है। फिर भी प्रशासन अलर्ट पर है और तटीय इलाकों में निगरानी तेज कर दी गई है।
मुख्य भूकंप के बाद इलाके में 30 से अधिक आफ्टरशॉक दर्ज किए गए हैं। स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए हैं और सार्वजनिक स्थलों पर डटे हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और आपातकालीन टीमों को सक्रिय कर दिया है।
कामचटका प्रायद्वीप ‘रिंग ऑफ फायर’ का हिस्सा है – यह इलाका प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले उस क्षेत्र में आता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां यूरेशियन और प्रशांत टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, जिससे इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप आते हैं।
रूस के इस क्षेत्र में पहले भी कई खतरनाक भूकंप आ चुके हैं। सबसे भयंकर भूकंप 5 नवंबर 1952 को आया था, जिसकी तीव्रता 9.0 थी। उस समय आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी। इसके अलावा 2016 में 7.2 और 2017 में 7.7 तीव्रता वाले भूकंप कामचटका और बेरिंग इलाके में आ चुके हैं।
हालांकि अब तक सुनामी जैसी कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा नहीं आई है, फिर भी भूगर्भीय विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स और ज्वालामुखी गतिविधियां आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती हैं। इसीलिए प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहना जरूरी है। वैश्विक भूकंपीय मानचित्र में यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि धरती का यह हिस्सा कितना संवेदनशील है।
Bilaspur Bird Flu Alert: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है,…
AIADMK Election Manifesto: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन को 'महासप्तमी' के रूप में अत्यंत…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर सातवां दिन मां दुर्गा के…
Ambikapur Airport: छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई…
Love Affair Case: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने…
This website uses cookies.