Zelensky's Claim
Zelensky’s Big Claim: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। जेलेंस्की का दावा है कि सऊदी अरब में स्थित एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी हमले के पीछे रूस का हाथ था। उनके अनुसार, रूस ने हमले से ठीक पहले इस बेस की खुफिया सैटेलाइट तस्वीरें ईरान के साथ साझा की थीं, जिसकी वजह से ईरान का हमला इतना सटीक रहा और कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। यह दावा अमेरिका, रूस और ईरान के बीच बढ़ते तनावपूर्ण त्रिकोण को एक नई और खतरनाक दिशा दे सकता है।
एनबीसी न्यूज़ (NBC News) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में जेलेंस्की ने रूस और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य साठगांठ पर तीखे प्रहार किए। जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस ने ईरान की मदद की है, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, “बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है। यह सौ प्रतिशत सच है।” जेलेंस्की का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईरानियों की मदद करना पूरी तरह से रूस के सामरिक हित में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें न केवल इस बात पर विश्वास है, बल्कि उनके पास इस जानकारी के पुख्ता प्रमाण भी हैं कि दोनों देश आपस में खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि यह जानकारी उनके देश की खुफिया एजेंसियों द्वारा जुटाई गई है और उन्हें राष्ट्रपति ब्रीफिंग के दौरान विस्तृत रूप से दी गई थी। यूक्रेनी खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, रूसी सैटेलाइटों ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पैनी नजर रखी हुई थी। सैटेलाइट ने हमले से ठीक पहले 20 मार्च, 23 मार्च और 25 मार्च को इस एयर बेस की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें ली थीं। इन तस्वीरों के जरिए बेस की सुरक्षा व्यवस्था और सैनिकों की तैनाती का सटीक अनुमान लगाया गया, जिसका सीधा फायदा ईरान को मिला।
रूसी खुफिया जानकारी मिलने के तुरंत बाद, 26 मार्च को ईरान ने प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर एक बड़ा हमला बोल दिया। इस बेस पर अमेरिकी और सऊदी अरब दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त रूप से तैनात हैं। ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए बेस पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 आत्मघाती ड्रोन दागे। जेलेंस्की के अनुसार, बार-बार ली गई सैटेलाइट तस्वीरों ने ईरान को यह समझने में मदद की कि उन्हें कहाँ और कब वार करना है, ताकि अधिकतम नुकसान पहुँचाया जा सके।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) और अन्य सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 15 सैनिक घायल हुए हैं। इनमें से 5 सैनिकों की स्थिति काफी गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के शुरुआती बयानों में 10 सैनिकों के घायल होने और 2 के गंभीर रूप से जख्मी होने की बात कही गई थी। जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक संयोग नहीं था, बल्कि रूस द्वारा उपलब्ध कराई गई सटीक लोकेशन और डेटा का परिणाम था।
जेलेंस्की ने यूक्रेन के पिछले दो सालों के युद्ध अनुभवों का हवाला देते हुए रूसी सैटेलाइट गतिविधियों के एक खास पैटर्न के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “हम रूसी काम करने के तरीके को जानते हैं। अगर वे किसी जगह की एक बार तस्वीर लेते हैं, तो वे तैयारी कर रहे होते हैं। अगर वे दूसरी बार तस्वीर लेते हैं, तो यह एक तरह का अभ्यास (rehearsal) है। और अगर वे तीसरी बार तस्वीर लेते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि अगले एक या दो दिन में वे हमला करने वाले हैं।” यूक्रेन ने अपने युद्ध में भी इसी तरह की गतिविधियों को कई बार नोट किया है।
हालांकि जेलेंस्की ने दावे बड़े किए हैं, लेकिन एनबीसी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कीव की इस ब्रीफिंग में सैटेलाइट तस्वीरों के प्रत्यक्ष प्रमाण (जैसे फोटो की कॉपी) या यह जानकारी उन्हें कैसे मिली, इसका कोई स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। वर्तमान में, रूस और ईरान दोनों ने ही इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि ये दावे सच साबित होते हैं, तो अमेरिका और रूस के संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकते हैं।
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