Poseidon Torpedo
Russia, Poseidon Torpedo: दुनिया की महाशक्तियों में शुमार रूस ने अपनी सैन्य ताकत में एक ऐसा ब्रह्मास्त्र शामिल किया है, जिसने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। इस हथियार को ‘पोसीडन’ (Poseidon) नाम दिया गया है, जिसे सैन्य जगत में ‘डूम्सडे ड्रोन’ और ‘समंदर का राक्षस’ जैसे खौफनाक नामों से पुकारा जा रहा है। यह मात्र एक टॉरपीडो नहीं है, बल्कि समुद्र की अगाध गहराइयों से महाविनाश करने वाला एक पूर्ण परमाणु सिस्टम है, जो रूस की सामरिक सुरक्षा को एक अभेद्य कवच प्रदान करता है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वयं इस हथियार की संहारक क्षमता का लोहा मनवाया है। पुतिन के अनुसार, पोसीडन एक ऐसा सिस्टम है जिसे वर्तमान की किसी भी एंटी-मिसाइल या रक्षा तकनीक से रोकना नामुमकिन है। इसकी बनावट और तकनीक इसे रडार और ट्रैकिंग सिस्टम की पहुंच से बाहर रखती है। पुतिन का मानना है कि यह ड्रोन रूस की रणनीतिक सुरक्षा को उस ऊंचाई पर ले जाता है, जहां दुश्मन हमला करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर हो जाएगा।
पोसीडन मूल रूप से परमाणु ऊर्जा से संचालित होने वाला एक स्वायत्त अंडरवॉटर वाहन (UUV) है। इसे विशेष रूप से डिजाइन की गई रूसी पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘स्टेल्थ’ क्षमता है; यह समुद्र के भीतर इतना कम शोर करता है कि दुश्मन के अत्याधुनिक सोनार सिस्टम भी इसे पहचानने में विफल हो जाते हैं। परमाणु ऊर्जा पर चलने के कारण इसकी मारक क्षमता असीमित है और यह हजारों मील की दूरी तय कर लक्ष्य को भेद सकता है।
रूसी रणनीतिकारों का दावा है कि पोसीडन का मुख्य उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों को नष्ट करना नहीं है। यदि इसे किसी देश के तटीय क्षेत्र के पास विस्फोटित किया जाता है, तो यह भीषण रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा करने में सक्षम है। इस विस्फोट से उठने वाली विशाल समुद्री लहरें न केवल तटों को जलमग्न कर देंगी, बल्कि अपने साथ जानलेवा रेडिएशन भी फैलाएंगी। इस घातक विकिरण का प्रभाव इतना व्यापक होगा कि प्रभावित क्षेत्र कई पीढ़ियों तक रहने योग्य नहीं बचेगा।
पोसीडन का ढांचा उच्च श्रेणी के टाइटेनियम अलॉय से तैयार किया गया है, जो इसे समुद्र के भीषण दबाव को सहने की शक्ति देता है। इसके भीतर एक छोटा लेकिन अत्यंत शक्तिशाली परमाणु रिएक्टर लगा है, जो इसे पारंपरिक टॉरपीडो की तुलना में कहीं अधिक गति और रेंज प्रदान करता है। इसकी बेमिसाल रफ्तार और गहराई में जाने की क्षमता इसे आधुनिक नौसैनिक युद्ध में ‘अजेय’ बनाती है।
रूस इस ड्रोन को केवल सक्रिय पनडुब्बियों से ही नहीं चलाता, बल्कि इसे ‘स्किफ’ नामक विशेष तकनीक के जरिए समुद्र की तलहटी में निष्क्रिय अवस्था में भी तैनात कर सकता है। इसके तहत पोसीडन को एक सुरक्षात्मक कंटेनर में बंद कर समुद्र में छिपा दिया जाता है। यह वहां महीनों तक ‘स्लीप मोड’ में रह सकता है। जैसे ही मॉस्को से कमांड मिलती है या कोई पूर्वनिर्धारित लक्ष्य सीमा में आता है, यह अचानक सक्रिय होकर विनाशकारी हमला कर देता है।
इसे ‘डूम्सडे’ यानी कयामत का हथियार इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका उपयोग ‘सेकंड स्ट्राइक’ के तौर पर किया जाना तय है। यह दुश्मन के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। पर्यावरणीय विनाश, रेडियोधर्मी जल और तटीय तबाही का संगम इसे दुनिया का सबसे क्रूर हथियार बनाता है।
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