अंतरराष्ट्रीय

Russia Ukraine War: रूस ने यूक्रेन के दो बड़े शहरों को घेरा, पुतिन ने सैनिकों के लिए रखी ‘आत्मसमर्पण’ की शर्त

Russia Ukraine War : रूस-यूक्रेन युद्ध में स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही है। रूसी सेना ने यूक्रेन की रक्षा दीवार तोड़ने के बाद अब दो पूर्वी शहरों पर घेराबंदी कर दी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि पोक्रोवस्क (पूर्वी दोनेत्स्क) और कुपियांस्क (उत्तर-पूर्वी खार्किव) को पूरी तरह से घेर लिया गया है। इसके साथ ही पुतिन ने कहा कि इन शहरों में मौजूद यूक्रेनी सैनिकों से आत्मसमर्पण की कोई बातचीत नहीं होगी।

घेराबंदी और पुतिन का दावा

रूसी राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार, पूर्वी दोनेत्स्क के पोक्रोवस्क और खार्किव क्षेत्र के रेल जंक्शन कुपियांस्क में यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया गया है। उन्होंने पत्रकारों को इन इलाकों का दौरा करने के लिए भी कहा, ताकि घेराबंदी के दावे की पुष्टि की जा सके। पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस किसी समझौते के लिए आत्मसमर्पण को प्राथमिकता नहीं देगा, बल्कि पूरी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

यूक्रेन ने दावे का किया खंडन

दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों ने पुतिन के दावों का खुलकर खंडन किया है। यूक्रेन के पूर्वी सेना प्रवक्ता ह्रीहोरी शापोवाल ने कहा कि पोक्रोवस्क में हालात कठिन जरूर हैं, लेकिन शहर कंट्रोल में है। कुपियांस्क को घेरने के दावे को उन्होंने “मनगढ़ंत और काल्पनिक” बताया।

रूस की सैन्य तैयारी और स्थिति

सोशल मीडिया पर आई रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने पोक्रोवस्क में घेराबंदी के लिए लगभग 11,000 सैनिकों की तैनाती की है। यूक्रेनी सेना की 7वीं रैपिड रिएक्शन कोर ने स्वीकार किया कि कुछ रूसी सैन्य इकाइयाँ पोक्रोवस्क में घुसपैठ करने में सफल रही हैं। हालांकि, यह भी साफ किया गया कि शहर पूरी तरह से कब्जे में नहीं है।

युद्ध की बढ़ती जटिलता

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस का यह कदम यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों में नियंत्रण बढ़ाने और सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। दोनों पक्षों के बीच लगातार बयानबाजी और सोशल मीडिया रिपोर्टों के कारण युद्ध की वास्तविक स्थिति जनता के लिए स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष में पोक्रोवस्क और कुपियांस्क के घेराव से स्थिति और भी जटिल हो गई है। पुतिन का दावा और यूक्रेनी खंडन दोनों ही वैश्विक राजनीति और मीडिया के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं। युद्ध के इस चरण में ये इलाके रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक लाभ और दबाव का केंद्र बन सकते हैं।

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