Russia Ukraine War
Russia Ukraine War: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों अपनी तुर्की यात्रा पर हैं, जहाँ उनके बयानों ने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। 16 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान पुतिन ने यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए यूरोपीय नेताओं को मात्र ‘पश्चिमी प्रचार का एजेंट’ करार दिया। पुतिन का यह हमला यूरोप के उन देशों की ओर था जो यूक्रेन युद्ध में सक्रिय रूप से कीव का साथ दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की यह भाषा मॉस्को की उस गहरी निराशा को दर्शाती है, जो पिछले कई वर्षों से जारी युद्ध के अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण उपजी है।
पुतिन की इस तल्खी के पीछे एक बड़ा कारण यूरोपीय संघ द्वारा यूक्रेन को दी जा रही अभूतपूर्व आर्थिक और सैन्य मदद है। आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से अब तक यूरोपीय संघ ने 1 लाख करोड़ यूरो से अधिक की सहायता राशि और हथियार यूक्रेन को उपलब्ध कराए हैं। इस भारी-भरकम मदद ने युद्ध के मैदान में रूस की जीत के दावों और प्रयासों को अब तक विफल कर दिया है। रूस ने शुरुआत में जिस त्वरित विजय की कल्पना की थी, वह अब एक लंबी और थकाऊ खींचतान में बदल चुकी है। पुतिन का मानना है कि पश्चिमी देश जानबूझकर इस संघर्ष को खींच रहे हैं, ताकि रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति को कमजोर किया जा सके।
दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने एक नया और चौंकाने वाला दावा किया है। जेलेंस्की ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया है कि रूस अपनी रणनीति बदल रहा है और वह वर्ष 2026 को ‘पूर्ण युद्ध के वर्ष’ के रूप में देख रहा है। जेलेंस्की के अनुसार, मॉस्को की वर्तमान शांति वार्ता की बातें या कूटनीतिक प्रयास केवल एक दिखावा हैं। उनका मानना है कि रूस दरअसल कूटनीति को ढाल बनाकर समय लेना चाहता है ताकि वह अपनी सैन्य तैयारियों को फिर से मजबूत कर सके और यूक्रेन की अधिक से अधिक भूमि पर कब्जा करने की अपनी साजिश को अंजाम दे सके। जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि रूस का इरादा केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं है।
जेलेंस्की ने अमेरिका और अपने अन्य पश्चिमी साझेदारों से भावुक और रणनीतिक अपील करते हुए कहा कि मॉस्को का आक्रामक रवैया केवल यूक्रेन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी पश्चिमी सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक अस्तित्वगत खतरा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि आज यूक्रेन कमजोर पड़ता है, तो भविष्य में नाटो (NATO) के अन्य देश रूस के अगले निशाने पर हो सकते हैं। यूक्रेन ने मांग की है कि नाटो को अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रूस की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक ठोस और एकजुट सैन्य प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता है।
पुतिन और जेलेंस्की के इन विरोधाभासी बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में इस युद्ध के समाप्त होने के आसार बहुत कम हैं। जहाँ एक ओर रूस अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए कूटनीतिक आक्रामकता दिखा रहा है, वहीं यूक्रेन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए पश्चिमी देशों को एकजुट करने में जुटा है। 2026 को लेकर जेलेंस्की की भविष्यवाणी ने रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह संकेत देता है कि आने वाले समय में सैन्य टकराव और अधिक भीषण रूप ले सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि अमेरिका और नाटो इस उभरती चुनौती पर क्या रुख अपनाते हैं।
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