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S Jaishankar in Poland: “आतंकवाद की फैक्ट्री चलाने वालों से नरमी नहीं”, जयशंकर ने पोलैंड में पाकिस्तान को किया बेनकाब

S Jaishankar in Poland: देश की राजधानी दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कूटनीतिक रूप से गरमागरम बैठक हुई। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत ने आतंकवाद के प्रति अपने सख्त रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया। एस. जयशंकर ने पोलैंड द्वारा पाकिस्तान के प्रति दिखाए जा रहे नरम रुख और पूर्व में दिए गए विवादित बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने पोलैंड को स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया को ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाना चाहिए और किसी भी देश को आतंकी ढांचे का समर्थन करने से बचना चाहिए।

सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान: भारत ने सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से रखा

विदेश मंत्री जयशंकर ने पोलैंड के अपने समकक्ष से दो टूक शब्दों में कहा कि पोलैंड को ऐसी किसी भी गतिविधि में सहयोग या समर्थन नहीं देना चाहिए जिससे पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकवादी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा, “आप इस क्षेत्र की भौगोलिक और राजनैतिक स्थितियों से अनजान नहीं हैं। सीमा पार से होने वाला आतंकवाद भारत के लिए एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है।” जयशंकर ने न्यूयॉर्क और पेरिस में दिए अपने बयानों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भारत को विभिन्न वैश्विक मंचों पर ‘चुन-चुनकर’ निशाना बनाना अनुचित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए।

पोलैंड की सहमति: सिकोर्स्की ने स्वीकार किया राज्य प्रायोजित आतंकवाद का खतरा

भारतीय विदेश मंत्री के कड़े रुख के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोर्स्की ने उनकी बातों पर सहमति जताई। उन्होंने स्वीकार किया कि सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करना वर्तमान समय की अनिवार्य जरूरत है। सिकोर्स्की ने पोलैंड का उदाहरण देते हुए बताया कि उनका देश भी हाल ही में आगजनी और राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार हुआ है। उन्होंने खुलासा किया कि पोलैंड की रेलवे लाइन को उड़ाने की कोशिश की गई थी, लेकिन आतंकवादियों की नाकामी के कारण कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। इस स्वीकारोक्ति ने यह दर्शाया कि आतंकवाद अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन चुका है।

कश्मीर मुद्दे पर तनाव: संयुक्त बयान में कश्मीर के जिक्र पर भारत की नाराजगी

बैठक के दौरान जयशंकर ने अक्टूबर 2025 की उस घटना का भी जिक्र किया जिसने भारत और पोलैंड के संबंधों में खटास पैदा की थी। दरअसल, पोलैंड ने पाकिस्तान के साथ एक साझा बयान जारी किया था जिसमें जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किया गया था। भारत ने उस समय भी इसकी कड़ी निंदा की थी और इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना था। आज की बैठक में जयशंकर ने सिकोर्स्की के सामने व्यक्तिगत रूप से यह मुद्दा उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ किसी भी द्विपक्षीय बातचीत में कश्मीर का संदर्भ देना अवांछनीय है।

व्यापार और टैरिफ: अमेरिकी नीतियों के खिलाफ भारत और पोलैंड एक सुर में

आतंकवाद के अलावा, बैठक में वैश्विक व्यापार पर भी विस्तृत चर्चा हुई। पोलैंड ने टैरिफ के मुद्दे पर भारत के स्टैंड का पुरजोर समर्थन किया। हाल ही में एस. जयशंकर ने कहा था कि अमेरिका टैरिफ का उपयोग करके खास देशों को निशाना बना रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा हो रही है। रादोस्लाव सिकोर्स्की ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि चुनिंदा देशों को निशाना बनाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक है। उन्होंने भारत की सराहना करते हुए कहा कि यूरोप में नए दूतावासों की स्थापना यह दर्शाती है कि भारत यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को लेकर बेहद गंभीर है।

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