Sakat Chauth 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे देश के विभिन्न हिस्सों में ‘तिलकुटा चौथ’, ‘माघ चतुर्थी’ या ‘तिलवा चौथ’ के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 6 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुखी जीवन और बेहतर स्वास्थ्य की कामना के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की आराधना करने से बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। यह एक कठिन व्रत माना जाता है क्योंकि माताएं इसे निर्जला (बिना पानी के) रखती हैं।

Sakat Chauth 2026: भगवान गणेश और तिलकुट का विशेष संबंध
सकट चौथ के व्रत में भगवान श्री गणेश, सकट माता और चंद्रदेव की पूजा का विधान है। इस पूजा में तिलकुट (तिल और गुड़ का मिश्रण) का प्रसाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, तिलकुट भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि सकट चौथ के दिन तिल का दान और सेवन करने से व्यक्ति के सभी मानसिक और शारीरिक कष्टों का निवारण होता है। इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है और प्रसाद के रूप में तिलकुट ग्रहण किया जाता है।
Sakat Chauth 2026: सर्दियों में तिलकुट सेवन का वैज्ञानिक आधार
तिलकुट केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है। डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, सकट चौथ का त्योहार कड़ाके की ठंड के समय आता है। तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है। शीत ऋतु में शरीर को आंतरिक रूप से गर्म रखने और ठंड के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए तिलकुट एक औषधि की तरह काम करता है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और मौसमी बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।
तिलकुट में छिपे पोषक तत्वों का खजाना
आयुर्वेद के अनुसार, तिल में हेल्दी फैट्स, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। वहीं गुड़ आयरन, पोटैशियम और विटामिन्स का मुख्य स्रोत है। जब इन दोनों का मिश्रण ‘तिलकुट’ के रूप में लिया जाता है, तो यह शरीर को निम्नलिखित लाभ पहुँचाता है:
ऊर्जा का स्तर बढ़ाना: इसमें मौजूद पोषक तत्व थकान और कमजोरी को दूर कर शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
इम्यूनिटी बूस्ट करना: एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह संक्रमण से बचाव करता है।
हड्डियों की मजबूती: तिल में मौजूद उच्च कैल्शियम हड्डियों के घनत्व को बढ़ाता है।
खून की कमी दूर करना: आयरन की अधिकता के कारण यह एनीमिया की समस्या में रामबाण है।
पाचन और त्वचा के लिए वरदान
तिलकुट का नियमित लेकिन सीमित सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। इसके अलावा, तिल में मौजूद हेल्दी फैट्स त्वचा को भीतर से पोषण देते हैं, जिससे सर्दियों में स्किन की ड्राईनेस कम होती है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक है, जिससे रक्त शुद्ध होता है और त्वचा स्वस्थ रहती है।
सावधानियां और डॉक्टर की सलाह
भले ही तिलकुट स्वास्थ्यवर्धक है, लेकिन इसका सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, चूंकि तिल और गुड़ दोनों गर्म होते हैं, इसलिए इनका अत्यधिक सेवन पेट में गड़बड़ी पैदा कर सकता है। जिन लोगों को तिल से एलर्जी है, उन्हें इससे बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त, मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों या किसी विशेष चिकित्सीय स्थिति से जूझ रहे व्यक्तियों को गुड़ के सेवन से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। हमेशा ध्यान रखें कि किसी भी खाद्य पदार्थ का लाभ तभी मिलता है जब उसका सेवन संयमित मात्रा में किया जाए।
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