Sakti Vedanta Tragedy: सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। कांग्रेस द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट के मुख्य अंश सार्वजनिक कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्लांट प्रबंधन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस ने इस घटना को महज एक तकनीकी खराबी मानने से इनकार करते हुए इसे ‘प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही’ करार दिया है।

लापरवाही की इंतहा: चालू बॉयलर में किया गया मेंटेनेंस
कांग्रेस की जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि प्लांट के भीतर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। डॉ. चरणदास महंत ने बताया कि नियमों के मुताबिक जब एक बॉयलर की सफाई या मेंटेनेंस का काम चलता है, तो सुरक्षा की दृष्टि से दूसरे बॉयलर को बंद रखना अनिवार्य होता है। हालांकि, वेदांता प्लांट में उत्पादन के लालच में एक बॉयलर को चालू रखकर ही दूसरे का मेंटेनेंस किया जा रहा था। इसी कारण तापमान में अचानक असंतुलन पैदा हुआ और एक जोरदार ब्लास्ट हुआ, जिसने कई मासूम मजदूरों की जान ले ली।
पुराने ढांचे और घटिया चीनी मशीनरी पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में प्लांट की मशीनरी की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह पावर प्लांट पहले ‘एथेना पावर’ के नाम से जाना जाता था और लगभग 10 वर्षों तक बंद पड़ा था। जब वेदांता ग्रुप ने इसे खरीदा और दोबारा शुरू किया, तब उपकरणों का उचित तकनीकी ऑडिट नहीं कराया गया। आरोप है कि प्लांट में बड़े पैमाने पर घटिया स्तर की ‘चाइनीज मशीनरी’ का उपयोग किया गया है, जो उच्च दबाव और तापमान सहने में सक्षम नहीं थी। बिना सेफ्टी ऑडिट के प्लांट शुरू करना सीधे तौर पर जानमाल से खिलवाड़ है।
सरकारी तंत्र की विफलता और औद्योगिक सुरक्षा विभाग का मौन
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने इस हादसे के लिए राज्य सरकार के उद्योग सुरक्षा विभाग को बराबर का दोषी ठहराया है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या बॉयलर और किलेन की नियमित जांच की गई थी? बैज ने आरोप लगाया कि विभाग ने अपनी आंखें मूंद रखी थीं, जिसके कारण मेंटेनेंस के दौरान कोई सुरक्षा निरीक्षण नहीं हुआ। सरकार की यह विफलता ही है कि आज प्रदेश के मजदूर असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
ढाई साल में 300 मजदूरों की मौत: एक गंभीर चिंता
कांग्रेस ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों के भीतर छत्तीसगढ़ के विभिन्न उद्योगों में हादसों के चलते लगभग 300 मजदूरों की जान जा चुकी है। नेताओं ने कहा कि सक्ती का यह हादसा केवल एक ‘दुर्घटना’ नहीं बल्कि ‘सदोष मानव वध’ है। मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण, जैसे हेलमेट, जैकेट या प्रॉपर ब्रीदिंग गियर के, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में भेजा जा रहा था। बिना वर्क परमिट के संवेदनशील काम कराना प्रबंधन की तानाशाही को दर्शाता है।
कड़ी कार्रवाई और सुरक्षा ऑडिट की पुरजोर मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में कांग्रेस ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी उद्योगों का तत्काल प्रभाव से ‘थर्ड पार्टी सुरक्षा ऑडिट’ कराया जाए। साथ ही, प्लांट प्रबंधन के साथ-साथ उन अधिकारियों पर भी कड़ी धाराओं में FIR दर्ज हो जिन्होंने निरीक्षण में कोताही बरती। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, तो वे सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना होगा कि सरकार इस रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाती है।


















