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Sanchar Saathi: संचार साथी से जासूसी नहीं होगी, सिंधिया का लोकसभा में स्पष्टीकरण

Sanchar Saathi:  केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संचार साथी ऐप को लेकर लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए ‘जासूसी’ और ‘निजता के उल्लंघन’ के गंभीर आरोपों का जोरदार खंडन किया है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के एक सवाल का जवाब देते हुए, सिंधिया ने स्पष्ट किया कि संचार साथी ऐप के माध्यम से नागरिकों की स्नूपिंग (जासूसी) करना न तो संभव है और न ही कभी ऐसा होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐप की सफलता और इसका व्यापक उपयोग सीधे तौर पर जनता के विश्वास और सहभागिता का परिणाम है। मंत्री ने यह आश्वासन भी दिया कि सरकार नागरिकों से प्राप्त सुझावों और फीडबैक के आधार पर नियमों में आवश्यक सुधार करने के लिए हमेशा तत्पर है।

Sanchar Saathi: प्री-इंस्टॉलेशन पर विवाद: विपक्ष का प्राइवेसी पर सवाल

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सरकार ने स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को यह आदेश दिया कि वे नए हैंडसेट में यह सरकारी साइबर सिक्योरिटी ऐप पहले से ही इंस्टॉल (Pre-Install) करके रखें। इस निर्देश के तुरंत बाद, विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस ऐप के बहाने सरकार लोगों की निजी जानकारी (Private Information) में घुसपैठ करना चाहती है, उनकी जासूसी करना चाहती है और निजी डेटा हासिल करना चाहती है।इन आरोपों के जवाब में, केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पहले भी अपनी स्थिति स्पष्ट की थी और लोकसभा में भी उन्होंने इसे दोहराया। उन्होंने कहा कि ऐप का उपयोग करना या न करना, पूरी तरह से यूजर की मर्जी पर निर्भर करेगा, और सरकार का उद्देश्य केवल नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि उनकी जासूसी करना।

Sanchar Saathi: मंत्री का स्पष्टीकरण: ऐप वैकल्पिक, अनइंस्टॉल करना संभव

जासूसी की अटकलों को निर्णायक रूप से खारिज करते हुए, केंद्रीय संचार मंत्री ने दो महत्वपूर्ण बिंदु रखे:हटाने की सुविधा: संचार साथी ऐप को किसी भी अन्य ऐप की तरह मोबाइल फोन से अनइंस्टॉल (Uninstall) करके हटाया जा सकता है।वैकल्पिक एक्टिवेशन: जब तक यूजर स्वयं रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा, तब तक यह ऐप चालू नहीं होगा।

सिंधिया ने जोर देकर कहा कि मोबाइल हैंडसेट पर इस ऐप को एक्टिवेट करना अनिवार्य नहीं है। यह पूरी तरह से उपभोक्ताओं पर निर्भर करता है कि वे इसे किसी अन्य ऐप की तरह इस्तेमाल करें या डिलीट कर दें। इस तरह, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि निजता का कोई उल्लंघन नहीं होगा क्योंकि ऐप का उपयोग पूरी तरह से स्वैच्छिक है।

नागरिकों की सुरक्षा सरकार का कर्तव्य: ऐप लाने का वास्तविक उद्देश्य

केंद्रीय मंत्री ने ऐप लाने के पीछे के वास्तविक उद्देश्य को समझाते हुए कहा कि देश में एक अरब से अधिक मोबाइल यूजर्स हैं, लेकिन दुर्भाग्य से, कुछ लोग मोबाइल फोन का गलत इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों से अपने नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का परम कर्तव्य है।”

संचार साथी पोर्टल को इसी सोच के साथ साल 2023 में लॉन्च किया गया था। अब, मोबाइल ऐप को भी इसी दृष्टिकोण के साथ लाया गया है, ताकि नागरिक अपनी डिजिटल सुरक्षा को बेहतर ढंग से सुनिश्चित कर सकें। मंत्री ने दोहराया कि यह एक पूरी तरह से सुरक्षित ऐप है, जिसका उपयोग करना या न करना पूरी तरह से यूजर के विवेक पर निर्भर करेगा। इस स्पष्टीकरण के साथ, सरकार ने निजता बनाम सुरक्षा की बहस में सुरक्षा के पक्ष को मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि उपयोगकर्ता की स्वतंत्रता को बनाए रखने का आश्वासन दिया है।

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