Sanjay Park
Sanjay Park: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय पार्क से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ आवारा कुत्तों के हमले में 15 मासूम हिरणों की जान चली गई। इस त्रासदी ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि राज्य सरकार को भी कड़े प्रशासनिक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। वन विभाग की कार्यप्रणाली और जानवरों की सुरक्षा में बरती गई घोर लापरवाही अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है।
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए शासन ने एक विशेष जांच दल का गठन किया है। इस उच्च स्तरीय समिति का नेतृत्व सीसीएफ (Chief Conservator of Forests) सरगुजा और सीसीएफ वाइल्ड लाइफ जैसे दो अति-वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं। इस टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे घटनाक्रम की सूक्ष्मता से पड़ताल करें और एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपें। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि सुरक्षा घेरे में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और कुत्तों का झुंड बाड़े के भीतर प्रवेश करने में कैसे सफल रहा।
सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। शुरुआती कार्रवाई के तहत संजय पार्क का संचालन देख रही ‘वन प्रबंधन समिति शंकरघाट’ को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। इसके साथ ही, ड्यूटी पर तैनात डिप्टी रेंजर सहित पांच अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। संबंधित रेंजर को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया गया है। यह सख्त कदम दर्शाता है कि शासन इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला और गंभीर तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, संजय पार्क के बाड़े में बड़ी संख्या में हिरण, कोटरी और बारहसिंगा को रखा गया था, जबकि इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई थी। नियमों की यह खुली अनदेखी विभाग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करती है। बिना वैधानिक अनुमति और सुरक्षा मानकों के जानवरों को बाड़े में रखना न केवल अवैध है, बल्कि उनके जीवन को जोखिम में डालने जैसा है। अब जांच टीम इस पहलू पर भी गौर कर रही है कि आखिर इतने समय से यह अवैध संचालन किसकी शह पर हो रहा था।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी त्रासदी मानवीय भूल का नतीजा थी। बताया जा रहा है कि बाड़े का मुख्य गेट गलती से खुला रह गया था, जिसका फायदा उठाकर आवारा कुत्तों का झुंड अंदर दाखिल हो गया। सुरक्षित घेरे में रहने वाले हिरणों के पास बचाव का कोई रास्ता नहीं था और कुत्तों के हिंसक हमले में 15 हिरणों ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दी हैं। पार्क के रखवालों की यह छोटी सी चूक एक बड़े पारिस्थितिक नुकसान का कारण बन गई है, जिसे लेकर जनता में भारी आक्रोश है।
जांच समिति की जिम्मेदारी केवल दोषियों को ढूंढने तक सीमित नहीं है। उन्हें संजय पार्क की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक ऑडिट करने और भविष्य के लिए सुधार के सुझाव देने को भी कहा गया है। सरकार चाहती है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति दोबारा कभी न हो। बाड़ों की बाड़बंदी (Fencing) को मजबूत करने, आधुनिक निगरानी यंत्र लगाने और 24 घंटे कड़े पहरे की योजना बनाई जा रही है। अब सबकी निगाहें अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में और भी बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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