Money Laundering
Money Laundering : पंजाब की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब गुरुग्राम की एक अदालत ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में 7 दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में भेज दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से मंत्री की 10 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने एक सप्ताह की कस्टडी मंजूर की। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में फर्जी कंपनियों और जाली बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद करने का खेल खेला गया है।
इस मामले की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब ED ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर एजेंसी ने 05 मई को औपचारिक मामला दर्ज किया और फिर 09 मई को संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मंत्री के कानूनी सलाहकारों ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनके वकीलों का तर्क है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से “राजनीति से प्रेरित” है और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ED ने अदालत के समक्ष सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने मोबाइल फोन निर्यात के नाम पर करीब 157 करोड़ रुपये का संदिग्ध टर्नओवर दिखाया था। जांच में पाया गया कि इसमें से लगभग 102 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट केवल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की दो कंपनियों को किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि ये विदेशी कंपनियां और अरोड़ा की कंपनी आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। संदेह है कि मोबाइल फोन के निर्यात का यह पूरा ढांचा केवल कागजों पर खड़ा किया गया था ताकि धन का अवैध हेरफेर किया जा सके।
PMLA के तहत चल रही इस जांच में एक और बड़ा आरोप ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) की चोरी का है। ED के मुताबिक, करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के मोबाइल फोन की फर्जी जीएसटी खरीद दिखाई गई। इसके लिए दिल्ली स्थित ऐसी कंपनियों से बिल बनवाए गए जिनका वास्तविकता में कोई वजूद ही नहीं था। इन “अस्तित्वहीन” कंपनियों के माध्यम से फर्जी बिल प्राप्त कर सरकारी खजाने से जीएसटी रिफंड लिया गया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि असली पैसों के स्रोत को छिपाने के लिए कई शेल कंपनियों और जटिल बैंक खातों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
अदालत की कार्यवाही के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने संजीव अरोड़ा की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। एजेंसी ने दलील दी कि अरोड़ा कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) के पद पर आसीन थे और पूरे व्यापारिक संचालन पर उनका सीधा नियंत्रण था। फर्जी खरीद-फरोख्त, अवैध निर्यात और गलत तरीके से जीएसटी रिफंड प्राप्त करने की पूरी योजना उनके मार्गदर्शन में तैयार की गई थी। ED का मानना है कि हिरासत में पूछताछ के दौरान ही इस वित्तीय धोखाधड़ी की पूरी कड़ी का पर्दाफाश हो पाएगा।
दूसरी ओर, संजीव अरोड़ा के पक्ष ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनके बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग के बजाय FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के नियमों से जुड़ा हो सकता है और अब तक अपराध से हुई किसी ठोस कमाई का सबूत पेश नहीं किया गया है। दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद, गुरुग्राम कोर्ट ने माना कि आरोपों की प्रकृति गंभीर है और गहन पूछताछ अनिवार्य है। अदालत ने 7 दिन की रिमांड देते हुए यह निर्देश भी दिया कि आरोपी को उचित मेडिकल सुविधाएं और अपने वकील से परामर्श करने की अनुमति दी जाए।
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