हरियाणा

Sant Rampal Release : हिसार जेल से 11 साल बाद बाहर आए संत रामपाल, भारी सुरक्षा के बीच निकला काफिला

Sant Rampal Release : हरियाणा के हिसार स्थित सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। लंबे समय से कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रहे रामपाल को जमानत मिलने के बाद शुक्रवार शाम हिसार की सेंट्रल जेल (आजाद नगर) से रिहा कर दिया गया। जेल प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस रिहाई को लेकर पहले से ही पुख्ता इंतजाम किए थे। जेल परिसर के बाहर भारी बैरिकेडिंग की गई थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। जैसे ही रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई, संत रामपाल को 5-6 लग्जरी गाड़ियों के सुरक्षा काफिले के साथ जेल से बाहर ले जाया गया। इस दौरान जेल के बाहर उनके समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

अदालत में जमानत की प्रक्रिया: 5-5 लाख के बेल बॉन्ड पर मिली आजादी

संत रामपाल की रिहाई का रास्ता एडीएसजे गगनदीप की अदालत से साफ हुआ। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उनके समर्थकों की ओर से 5-5 लाख रुपये के भारी-भरकम बेल बॉन्ड जमा कराए गए। उनके अधिवक्ता महेंद्र नैन ने मीडिया को जानकारी दी कि सभी कानूनी मानकों और कोर्ट के आदेशों का पालन करने के बाद ही जेल से रिहाई संभव हो सकी है। यह मामला मूल रूप से 12 जुलाई 2006 का है, जब रोहतक के करोंथा स्थित आश्रम में भड़की हिंसा में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इसी हत्या के मामले में रामपाल मुख्य आरोपी के रूप में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे थे।

विवादों और जेल का पुराना नाता: करोंथा से बरवाला आश्रम तक का घटनाक्रम

रामपाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। 2006 के हत्याकांड में करीब 22 महीने जेल काटने के बाद उन्हें अप्रैल 2008 में पहली बार जमानत मिली थी, जिसके बाद उन्होंने हिसार के बरवाला में अपना नया ठिकाना बनाया। हालांकि, जुलाई 2014 में जब उन्हें कोर्ट में पेश होना था, तब उनके समर्थकों और वकीलों के बीच हुए हिंसक टकराव ने मामले को और पेचीदा बना दिया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त रुख और गिरफ्तारी के आदेश के बावजूद रामपाल ने समर्पण करने के बजाय बरवाला आश्रम के चारों ओर हजारों समर्थकों की ‘मानव श्रृंखला’ बनवा दी थी, जिसने पुलिस के लिए बड़ी चुनौती पेश की थी।

नवंबर 2014 का ऑपरेशन बरवाला: देशद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोप

साल 2014 के नवंबर महीने में बरवाला आश्रम में जो हुआ, उसे देश के सबसे बड़े पुलिस ऑपरेशनों में गिना जाता है। करीब 14 दिनों तक चली पुलिस घेराबंदी के बाद, 18 नवंबर को सुरक्षा बल आश्रम में दाखिल हुए। वहां महिलाओं और बच्चों को ढाल बनाकर छिपे रामपाल को आखिरकार गिरफ्तार किया गया। इस घटना के बाद उन पर हत्या, देशद्रोह और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराओं में 5 नई एफआईआर दर्ज की गईं। निचली अदालत ने उन्हें दो मामलों में उम्रकैद की सजा भी सुनाई थी, जिसे वर्तमान में हाईकोर्ट ने स्थगित कर रखा है। अब तक 14 में से 11 मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है।

इंजीनियरिंग की नौकरी से कबीर पंथी संत बनने तक का सफर

सोनीपत के धनाना गांव के रहने वाले रामपाल का सफर काफी चौंकाने वाला रहा है। सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात रामपाल ने 1995 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर आध्यात्म की ओर रुख किया और रोहतक के करोंथा में सतलोक आश्रम की नींव रखी। कबीर पंथी विचारधारा का प्रचार करते हुए वे जल्द ही एक बड़े वर्ग के प्रिय बन गए। हालांकि, आर्य समाज पर उनकी टिप्पणियों ने बड़े विवादों को जन्म दिया। आज देशभर में उनके 15 से अधिक आश्रम हैं, लेकिन उनका मुख्य बरवाला आश्रम पिछले 11 वर्षों से कोर्ट के आदेश पर पुलिस की निगरानी और अटैचमेंट में है।

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