छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Politics : भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो को समर्थकों ने बीच रास्ते रोका, नहीं होने दी गिरफ्तारी

Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सीतापुर विधानसभा में नायब तहसीलदार और विधायक के बीच उपजा विवाद अब एक बेहद दिलचस्प और नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है। प्रशासनिक अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार व मारपीट के मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के बाद, शुक्रवार को एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। क्षेत्र के स्थानीय भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो जब कानून का सम्मान करते हुए खुद सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर में आईजी के समक्ष आत्मसमर्पण करने यानी गिरफ्तारी देने निकले, तो उनके अपने ही समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया।

समर्थकों ने सड़क पर लेटकर रोका विधायक का काफिला

विधायक रामकुमार टोप्पो को कानून के हवाले होने से रोकने के लिए समर्थकों ने भावनात्मक और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। हालात इस कदर बेकाबू और नाटकीय हो गए कि सैकड़ों की संख्या में मौजूद उत्तेजित कार्यकर्ता विधायक की गाड़ियों के काफिले के सामने सीधे मुख्य सड़क पर लेट गए। समर्थकों ने वाहनों के पहियों के आगे मानव श्रृंखला बना दी और रोते-बिलखते हुए अपने नेता को आगे बढ़ने से साफ मना कर दिया। अंततः, कार्यकर्ताओं के इस भारी विरोध, मान-मनौव्वल और जबरदस्त भावनात्मक दबाव के आगे झुकते हुए विधायक को अंबिकापुर जाने का अपना विचार छोड़ना पड़ा और वे वापस सीतापुर लौट आए।

क्या है पूरा मामला और क्यों दर्ज हुई एफआईआर

इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत राजापुर क्षेत्र में एक शासकीय कार्य के संपादन के दौरान हुई थी। आरोप है कि वहां ड्यूटी पर तैनात नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके सहयोगियों का किसी बात को लेकर तीखा विवाद और कथित तौर पर मारपीट का प्रकरण सामने आया था। इस घटना से नाराज राजस्व अधिकारियों और कर्मचारी संघ ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। चौतरफा प्रशासनिक दबाव के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सीतापुर विधायक के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और दुर्व्यवहार की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था।

खुद आत्मसमर्पण करने का किया था ऐलान

पुलिसिया कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्व सैनिक और वर्तमान विधायक रामकुमार टोप्पो ने एक गरिमापूर्ण कदम उठाने का फैसला किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि वे कानून से भागेंगे नहीं, बल्कि खुद शुक्रवार को अंबिकापुर पहुंचकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) कार्यालय में अपनी गिरफ्तारी सौंपेंगे। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए अपने समर्थकों से शांति व्यवस्था बनाए रखने, संयम बरतने और जिला मुख्यालय पर किसी भी तरह की भीड़ या राजनीतिक जमावड़ा न करने की भावुक अपील भी जारी की थी।

मंगारी के पास अचानक बदला शांतिपूर्ण माहौल

शुक्रवार दोपहर को तय कार्यक्रम के अनुसार विधायक टोप्पो अपने कुछ निजी सहयोगियों के साथ निजी वाहन से सीतापुर से अंबिकापुर स्थित आईजी दफ्तर की ओर रवाना हुए थे। लेकिन उनकी शांति बनाए रखने की अपील बेअसर साबित हुई। सीतापुर शहर से महज 15 किलोमीटर दूर मंगारी नामक स्थान के पास पहुंचते ही मंजर पूरी तरह बदल गया। वहां पहले से ही बड़ी संख्या में मुस्तैद कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने उनके काफिले को चारों तरफ से घेर लिया। कई कार्यकर्ता गाड़ियों के सामने धरने पर बैठ गए तो कुछ उग्र होकर सड़क पर लेट गए।

कार्यकर्ताओं की जिद के आगे बेबस हुए जनप्रतिनिधि

मंगारी के पास जुटे समर्थकों ने बेहद भावुक होकर विधायक का हाथ पकड़ लिया और उन्हें गाड़ी से नीचे उतरने पर मजबूर कर दिया। कार्यकर्ताओं का साफ तौर पर कहना था कि प्रशासन द्वारा उनके जनप्रतिनिधि के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित, झूठी और अन्यायपूर्ण है। वे किसी भी कीमत पर अपने लोकप्रिय नेता को सलाखों के पीछे नहीं जाने देंगे। मौके पर पैदा हुए इस बेहद संवेदनशील और भावुक माहौल के बीच विधायक टोप्पो ने काफी देर तक कार्यकर्ताओं को कानून का हवाला देकर समझाने की कोशिश की, लेकिन जनता की जिद के आगे उनकी एक न चली।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना यह नाटकीय मोड़

Naib Tehsildar Dispute

जब कार्यकर्ताओं ने किसी भी सूरत में रास्ता छोड़ने से इनकार कर दिया, तो मजबूरन विधायक रामकुमार टोप्पो को अपना अंबिकापुर दौरा बीच में ही स्थगित करना पड़ा। वे कार्यकर्ताओं की बात मानकर वापस सीतापुर लौट गए। गौरतलब है कि राजस्व अधिकारियों की हड़ताल, राजनीतिक बयानबाजी और एफआईआर के बाद इस पूरे मामले में वैसे ही तनाव बना हुआ था। लेकिन अब विधायक की गिरफ्तारी से ठीक पहले समर्थकों द्वारा किए गए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और उन्हें “वापस लौटा देने” की घटना ने छत्तीसगढ़ की सियासत में एक नया और सनसनीखेज अध्याय जोड़ दिया है।

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