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Saudi-UAE Rift: मिडिल ईस्ट में वर्चस्व की जंग, सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में क्यों आई दरार? जानें 5 बड़े कारण

Saudi-UAE Rift: मिडिल ईस्ट के दो सबसे शक्तिशाली देशों और पारंपरिक सहयोगियों, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच लंबे समय से सुलग रही खींचतान अब एक गंभीर मोड़ पर पहुँच गई है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तहनून बिन जायद को एक विस्तृत और कड़ा पत्र भेजकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस पत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच केवल क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि अब रणनीतिक मतभेद भी खुलकर सतह पर आ गए हैं।

सूडान और यमन पर ‘रेड लाइन’: सऊदी का कड़ा अल्टीमेटम

सऊदी क्राउन प्रिंस ने अपने पत्र में सूडान और यमन की मौजूदा स्थिति को लेकर यूएई को स्पष्ट चेतावनी दी है। सऊदी अरब का मानना है कि सूडान के गृहयुद्ध में यूएई की दखलअंदाजी और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) को दिया जा रहा खुला समर्थन उसकी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यमन के मामले में भी सऊदी अरब ने अपना रुख सख्त रखा है। क्राउन प्रिंस ने स्पष्ट कर दिया है कि यमन सऊदी का ‘प्रभाव क्षेत्र’ (Sphere of Influence) है और वह वहां की राजनीतिक व सुरक्षा स्थिति की पूरी जिम्मेदारी अकेले संभालने की योजना बना रहा है, जिसमें यूएई का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।

हथियारों की खेप पर बमबारी: रिश्तों में तल्खी का चरम

दोनों देशों के बीच मतभेद केवल कागजों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जमीनी कार्रवाई में भी तब्दील हो चुके हैं। पिछले दिसंबर में एक अभूतपूर्व घटना घटी, जब सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर यूएई के हथियारों की एक बड़ी खेप पर बमबारी कर दी। यह कार्रवाई यूएई समर्थित अलगाववादी गुटों को बिना सऊदी की सहमति के सैन्य मदद देने के विरोध में की गई थी। सऊदी अरब ने इस कदम को अपनी ‘रेड लाइन’ का उल्लंघन बताया था। यह सैन्य कार्रवाई वैश्विक कूटनीति के जानकारों के लिए एक बड़ा संकेत थी कि अब दोनों देशों के बीच समन्वय पूरी तरह टूट चुका है।

वॉशिंगटन को संदेश और प्रतिबंधों की आशंका

सऊदी क्राउन प्रिंस का यह पत्र केवल यूएई के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी एक कड़ा संदेश था। इसे इस तरह तैयार किया गया था कि वॉशिंगटन भी सऊदी की चिंताओं को समझ सके। दूसरी ओर, यूएई को यह संदेह था कि सऊदी अरब अमेरिकी प्रशासन के जरिए उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगवाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, सऊदी अरब ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि इन दोनों खाड़ी देशों के बीच दरार है, लेकिन उन्होंने इसे आसानी से सुलझाने की उम्मीद जताई।

कौन हैं ‘स्पाई शेख’ तहनून बिन जायद?

जिन्हें यह कड़ा पत्र भेजा गया है, वे तहनून बिन जायद यूएई की सत्ता संरचना के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं। वे यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के भाई हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं। अंतरराष्ट्रीय हलकों में उन्हें ‘स्पाई शेख’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि वे अक्सर पर्दे के पीछे रहकर जटिल कूटनीतिक गुत्थियां सुलझाते हैं। इसके अलावा, वे अबू धाबी के अरबों डॉलर के निवेश फंड की देखरेख भी करते हैं, जो उन्हें न केवल सैन्य रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद प्रभावशाली बनाता है।

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