Hormuz Strait
Hormuz Strait : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने वैश्विक व्यापार के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और तुर्की ने अब एक ऐसे वैकल्पिक मार्ग की तलाश तेज कर दी है जो समुद्री रास्तों पर उनकी निर्भरता को खत्म कर सके। दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ये देश अब जमीनी रेल लिंक, विशाल पाइपलाइन नेटवर्क और नए समुद्री गलियारों को विकसित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। इस रणनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज और लाल सागर जैसे संवेदनशील चोकपॉइंट्स के बिना सुरक्षित व्यापार सुनिश्चित करना है।
28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद हॉर्मुज में आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी। चूंकि यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है, इसलिए इसकी नाकेबंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया। तेल और गैस की कीमतों में आए उछाल और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण खाड़ी देशों को यह महसूस हुआ कि अब पुराने बुनियादी ढांचे पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और उसके पड़ोसियों द्वारा उठाए जा रहे ये कदम केवल आपातकालीन उपाय नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्र की रसद (logistics) व्यवस्था में एक बड़ा ‘ढांचागत बदलाव’ है।
नई योजना के तहत, माल की आवाजाही अब फारस की खाड़ी के बाहर स्थित ओमान और यूएई के बंदरगाहों से शुरू होगी। यहां से सामान को ट्रकों और ट्रेनों के जरिए सऊदी अरब के विशाल रेगिस्तानी रास्तों से होते हुए जॉर्डन पहुंचाया जाएगा। इसके बाद, इस माल को मिस्र की स्वेज नहर या सीरियाई बंदरगाहों के माध्यम से सीधे भूमध्य सागर तक ले जाया जाएगा। इस मार्ग के कई हिस्से पहले ही सक्रिय हो चुके हैं। यूएई और सऊदी अरब को जोड़ने वाले समुद्री-जमीनी कॉरिडोर और जॉर्डन की रेल सेवा ने इसी साल काम करना शुरू किया है। इसके अलावा, सऊदी अरब ने अपने ‘नियोम’ (NEOM) बंदरगाह से एक विशेष माल ढुलाई सेवा शुरू की है, जो इराक और खाड़ी देशों को स्वेज नहर से जोड़ती है।
व्यापार को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और जॉर्डन ने मिलकर ऐतिहासिक ‘हिजाज रेलवे’ को फिर से जीवित करने का फैसला किया है। यह महत्वाकांक्षी रेल नेटवर्क जेद्दा को अम्मान और दमिश्क के रास्ते सीधे तुर्की के इस्तांबुल शहर से जोड़ेगा। इस परियोजना के पूरा होने से खाड़ी देशों की पहुंच यूरोपीय बाजारों तक बहुत आसान और सुरक्षित हो जाएगी। तुर्की इस परियोजना में एक प्रमुख कड़ी के रूप में उभर रहा है, जो पूर्व और पश्चिम के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा।
हाल ही में जेद्दा में आयोजित खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय नेताओं ने एक ‘एकीकृत क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क’ के निर्माण पर सहमति जताई है। यह नेटवर्क न केवल सऊदी अरब को यूएई, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन से जोड़ेगा, बल्कि इसके समानांतर एक बहु-देशीय तेल और गैस पाइपलाइन नेटवर्क भी बिछाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सदस्य देशों के बीच बिजली ग्रिड और जल प्रणालियों को साझा करने पर भी गहन चर्चा हुई है। यह व्यापक ढांचागत विकास भविष्य में किसी भी सैन्य संघर्ष के दौरान खाड़ी देशों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक ठोस आधार बनेगा।
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