Chhattisgarh Liquor Scam
Chhattisgarh Liquor Scam : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में लंबे समय से जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव सौम्या चौरसिया और कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव बुधवार को जेल से बाहर आ गए हैं। दरअसल, करीब एक महीने पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका स्वीकार कर ली थी। हालांकि, अदालत ने एक विशेष शर्त रखी थी कि जिस दिन इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा चालान पेश किया जाएगा, उसी दिन उनकी रिहाई संभव होगी। बुधवार को जांच एजेंसी द्वारा चालान पेश किए जाने के साथ ही दोनों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बुधवार को रायपुर की विशेष अदालत में इस घोटाले से संबंधित 1500 पन्नों का 8वां पूरक चालान पेश किया। इस विस्तृत दस्तावेज में सौम्या चौरसिया, केके श्रीवास्तव और देवेंद्र डडसेना की भूमिकाओं का कच्चा चिट्ठा खोला गया है। जांच एजेंसी ने घोटाले से जुड़े कई अहम लेन-देन, व्हाट्सएप चैट और दस्तावेजी सबूत अदालत के समक्ष रखे हैं। गौरतलब है कि शराब घोटाले में EOW अब तक कुल 51 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिससे इस सिंडिकेट की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जेल से बाहर आने के बाद केके श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी ‘तांत्रिक’ वाली छवि पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में है, इसलिए अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने पूर्व सीएम भूपेश बघेल से अपने रिश्तों को स्वीकार करते हुए कहा कि उनके संबंध बहुत पुराने हैं और वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर व्यक्तिगत संबंधों को महत्व देते हैं। उन्होंने खुद को तांत्रिक कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दाढ़ी बढ़ाना या पूजा-पाठ करना गुनाह नहीं है। केके ने दावा किया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और वे किसी भी आगामी कार्रवाई से नहीं डरते।
आरोप पत्र के मुताबिक, सौम्या चौरसिया पर अपने शक्तिशाली प्रशासनिक पद का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप है। EOW का दावा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय में रहते हुए शराब घोटाले से जुड़े सिंडिकेट को प्रशासनिक सुविधा और राजनीतिक समर्थन प्रदान किया। जांच में उनकी सक्रिय संलिप्तता और साजिश के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने की भूमिका प्रमाणित होने की बात कही गई है। उन्हें इस अवैध उगाही तंत्र की मुख्य कड़ी के रूप में पेश किया गया है।
चालान में देवेंद्र डडसेना की भूमिका को ‘मनी मैनेजर’ के रूप में बताया गया है। डडसेना, जो राजीव भवन में अकाउंटेंट रह चुका है, पर अवैध धन को सुरक्षित रखने और उसे सिंडिकेट के निर्देशानुसार आगे भेजने का आरोप है। वहीं, केके श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने अवैध उगाही के पैसों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने, उसे मैनेज करने और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर काले धन को खपाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
EOW ने स्पष्ट किया है कि इस बड़े घोटाले की जांच अभी थमी नहीं है। एजेंसी अभी भी कई अन्य अधिकारियों, राजनीतिक हस्तियों और निजी फर्मों की भूमिका की जांच कर रही है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आने वाले समय में और भी पूरक चालान न्यायालय में पेश किए जा सकते हैं। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है, क्योंकि घोटाले की परतें अब प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुँच रही हैं।
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