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SC SIR Hearing: चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर संकट! सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब, 51 करोड़ वोटर्स का क्या होगा?

SC SIR Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और बिहार जैसे पाँच राज्यों में चल रहे ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को एक साथ संबद्ध कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन मामलों में सख्ती दिखाते हुए भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) को 1 दिसंबर 2025 तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। यह निर्देश इन सभी राज्यों के SIR मामलों पर लागू होगा।

कोर्ट ने सुनवाई की अगली तिथियाँ भी तय कर दी हैं: केरल मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी, जबकि बाकी सभी मामलों की सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल में ‘बूथ लेवल ऑफिसर’ (BLO) की मौत के गंभीर आरोपों पर भी ECI से 1 दिसंबर तक जवाब मांगा गया है।

SC SIR Hearing: केरल और तमिलनाडु याचिकाओं में अलग-अलग माँगें

सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने तमिलनाडु से संबंधित SIR मामले की सुनवाई सोमवार को करने की बात कही। केरल की याचिका में स्थानीय निकाय चुनावों के कारण SIR प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की गई है। हालाँकि, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ को सूचित किया कि यह याचिका पहले ही मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल है। इसके बावजूद, कोर्ट ने केरल राज्य के लिए अलग से स्थिति रिपोर्ट (Status Report) मांगी है। इस बीच, पश्चिम बंगाल से जुड़ी याचिका में एक बेहद गंभीर आरोप लगाया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान 23 BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की दुखद मौत हो चुकी है। कोर्ट ने इस गंभीर आरोप का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव कार्यालय से भी 1 दिसंबर तक विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BLOs की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित किसी भी गंभीर शिकायत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

SC SIR Hearing: बिहार का मामला भी संबद्ध, सिब्बल ने उठाया 50 फॉर्म अपलोड सीमा का मुद्दा

बिहार से जुड़ी याचिका को भी अन्य याचिकाओं के साथ संबद्ध कर दिया गया है, जिस पर दोपहर 2 बजे के बाद सुनवाई होनी थी। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपना पक्ष रखते हुए SIR प्रक्रिया की धीमी गति पर चिंता जताई। उन्होंने कोर्ट को बताया कि BLOs को एक बार में केवल 50 फॉर्म ही अपलोड करने की अनुमति दी गई है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया अनावश्यक रूप से धीमी हो रही है और तय समय सीमा में काम पूरा नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पक्ष रखा और कोर्ट को आश्वस्त किया।

उन्होंने कहा कि राज्य चुनाव आयोगों के साथ पूरा समन्वय है और प्रक्रिया में कोई बड़ी समस्या नहीं है। द्विवेदी ने डेटा पेश करते हुए बताया कि 99% मतदाताओं को फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं और 50% से अधिक फॉर्म का डिजिटलीकरण (Digitalization) भी हो चुका है।

EC के वकील का सख्त जवाब

सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने एक बड़ा बयान देते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर डर और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर रहे हैं, जबकि प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है। हालाँकि, इस आरोप पर कपिल सिब्बल ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कहा, “यह आपके (चुनाव आयोग के) अपने निर्देश हैं। 50 फॉर्म की सीमा आपने ही लगाई है। यह किसी राजनीतिक दल या नेता का मुद्दा नहीं है।”

कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साफ कर दिया कि प्रक्रिया में किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए और चुनाव आयोग द्वारा समयबद्ध और सटीक जवाब दाखिल करना अनिवार्य है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अगली दो सुनवाइयों (2 दिसंबर और 9 दिसंबर) में यह तय हो सकता है कि विभिन्न राज्यों में SIR की प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रहेगी या फिर इसमें यूज़र्स की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए कोई महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएँगे।

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