SCO Summit 2025: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं बैठक आज से चीन के तियानजिन में शुरू हो गई है, जो न केवल इस संगठन की रजत जयंती है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। खासकर तब, जब दुनिया अमेरिका की टैरिफ नीतियों, SWIFT दबदबे और डॉलर-आधारित व्यापार प्रणाली से जूझ रही है।
इस ऐतिहासिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति इसे विशेष बनाती है। चर्चा यह भी है कि भारत-रूस-चीन की त्रिमूर्ति इस मंच से अमेरिकी एकाधिकार के खिलाफ रणनीतिक कदम उठा सकती है।
अब तक वैश्विक स्तर पर ऐसा कोई ठोस गठबंधन नहीं बना था, जो अमेरिका की आर्थिक नीति और डॉलर वर्चस्व को चुनौती दे सके। लेकिन SCO की खासियत यह है कि इसके पास:
आबादी: वैश्विक जनसंख्या का 40%
भूगोल: यूरोप और एशिया का बड़ा हिस्सा
संसाधन: तेल, गैस, खनिज से लेकर मानव संसाधन तक
आर्थिक शक्ति: दुनिया की उभरती और स्थापित अर्थव्यवस्थाएं
SCO अब सिर्फ सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक आर्थिक और रणनीतिक गठबंधन का रूप लेता जा रहा है।
हालांकि SCO समिट का आधिकारिक एजेंडा आतंकवाद, चरमपंथ और क्षेत्रीय स्थिरता है, लेकिन अमेरिका की टैरिफ नीति भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
रूस की ऊर्जा और धातु आपूर्ति
चीन की मैन्युफैक्चरिंग तकनीक और ढांचा
भारत का कंज्यूमर मार्केट और IT सेक्टर
ये मिलकर सर्कुलर ट्रेड मॉडल तैयार कर सकते हैं, जो अमेरिकी टैरिफ और सप्लाई चेन पर निर्भरता को खत्म करेगा। यह कम लागत वाली वैकल्पिक अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
SWIFT सिस्टम, जिसे अमेरिका नियंत्रित करता है, वह अंतरराष्ट्रीय भुगतान पर अमेरिका को बेजा अधिकार देता है। लेकिन अब:
चीन ने CIPS (Cross-Border Interbank Payment System) विकसित किया है
रूस ने SPFS (System for Transfer of Financial Messages) तैयार किया है
इन तीनों को जोड़कर एक SCO आधारित डिजिटल पेमेंट सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जिससे सदस्य देशों को अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
SCO की 25वीं बैठक केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह वह मंच बन सकता है, जहां से अमेरिका की आर्थिक नीतियों को चुनौती देने वाली नई विश्व व्यवस्था की नींव रखी जाएगी। भारत-रूस-चीन की त्रिदेशीय रणनीति यदि सफल होती है, तो यह न केवल ट्रंप की टैरिफ नीति को बेअसर कर देगी, बल्कि SCO को वैश्विक शक्ति संतुलन का नया केंद्र बना देगी।
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