SECR RPF Action
SECR RPF Action: भारतीय रेलवे न केवल देश की जीवनरेखा है, बल्कि लाखों यात्रियों के सुरक्षित सफर की जिम्मेदारी भी ढोती है। इसी उत्तरदायित्व को निभाते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) इन दिनों बेहद सक्रिय नजर आ रहा है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और रेलवे परिसरों को अपराध मुक्त बनाने के लिए आरपीएफ द्वारा एक सघन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों के माध्यम से होने वाली अवैध गतिविधियों, विशेषकर नशीले पदार्थों की तस्करी को पूरी तरह से समाप्त करना है। आरपीएफ की इस सक्रियता ने न केवल अपराधियों में भय पैदा किया है, बल्कि आम यात्रियों के बीच सुरक्षा का विश्वास भी जगाया है।
नशीले पदार्थों के काले कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने विशेष रूप से “ऑपरेशन नारकोस” (Operation Narcos) की शुरुआत की है। इस विशेष मुहिम के तहत आरपीएफ की टीम ने पिछले दो वर्षों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। नशे के सौदागर अक्सर लंबी दूरी की ट्रेनों का उपयोग तस्करी के लिए करते हैं, लेकिन आरपीएफ के जवानों की पैनी नजरों और खुफिया सूचना तंत्र ने उनके इन मंसूबों को बार-बार नाकाम किया है। बिलासपुर, रायपुर और नागपुर मंडलों में इस ऑपरेशन को गति देने के लिए उच्च स्तरीय रणनीतियां बनाई गई हैं, जिससे तस्करी के नेटवर्क की कमर टूट गई है।
13 मई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सफलता के पीछे एक सुव्यवस्थित ढांचा काम कर रहा है। रेलवे सुरक्षा बल ने बिलासपुर, रायपुर और नागपुर मंडलों में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच (CIB) और स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के अधिकारियों को शामिल किया गया है। ये टीमें सादे लिबास में संदिग्धों पर नजर रखती हैं और डेटा विश्लेषण के माध्यम से तस्करी के संभावित रूटों की पहचान करती हैं। तीनों मंडलों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित सूचना साझा करने की प्रक्रिया ने ही करोड़ों रुपये के मादक पदार्थों की बरामदगी को संभव बनाया है।
वर्ष 2025 से लेकर अब तक की कार्रवाई के आंकड़े आरपीएफ की मुस्तैदी को साफ बयां करते हैं। वर्ष 2025 में कुल 63 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 78 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया। इस दौरान करीब 1.70 करोड़ रुपये मूल्य का 713 किलो से अधिक गांजा और अन्य नशीले पदार्थ जब्त किए गए। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही कार्रवाई और तेज हुई है। अब तक 38 मामलों में 60 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और लगभग 2.86 करोड़ रुपये की नशीली खेप पकड़ी गई है। कुल मिलाकर पिछले दो वर्षों में 4.56 करोड़ रुपये से अधिक का माल बरामद कर 138 तस्करों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है।
आरपीएफ ने तस्करी के मुख्य पैटर्न को पहचानते हुए ओडिशा की ओर से आने वाली ट्रेनों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। विशेष रूप से पुरी-अहमदाबाद एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, समता एक्सप्रेस और टिटलागढ़-बिलासपुर पैसेंजर जैसी ट्रेनों में निरंतर चेकिंग की जा रही है। इन ट्रेनों के कोच, शौचालय और लावारिस सामानों की गहन तलाशी ली जाती है। आरपीएफ का मानना है कि इन रूटों पर सतर्कता बढ़ाने से नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन को बाधित करने में मदद मिली है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह अभियान और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा।
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