कारोबार

Stock Market Crash: दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट ने डूबाए लाखों करोड़ रुपये

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और मध्य-पूर्व के बिगड़ते हालातों ने दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मचा दिया। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने निवेशकों की करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाहा कर दी और बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट का ब्यौरा

गुरुवार को जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स 952.61 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 75,911.10 के स्तर पर आ गिरा। वहीं, निफ्टी की हालत भी कुछ अलग नहीं थी; यह 289.60 अंक फिसलकर 23,577.25 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) बेहद नकारात्मक रही। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1,597 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया, जबकि मात्र 643 शेयर ही बढ़त के साथ हरे निशान में टिक पाए।

बैंकिंग और एविएशन सेक्टर ने बढ़ाई मुसीबत

आज की इस बाजार सुनामी में बैंकिंग और एविएशन सेक्टर के दिग्गज शेयरों ने सबसे ज्यादा गोता लगाया। निफ्टी पर सबसे अधिक नुकसान झेलने वाले शेयरों की सूची में आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, और एलएंडटी जैसे नाम शामिल रहे। वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते इंडिगो (InterGlobe Aviation) के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। इस दौर में केवल कोल इंडिया जैसे चंद शेयर ही निवेशकों को कुछ राहत दे पाए।

रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब

शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलकर 92.33 के स्तर पर पहुंच गया है। यह रुपया का अब तक का सबसे निचला स्तर (92.36) छूने के बेहद करीब है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने रुपये की कमर तोड़ दी है, जिससे आयात महंगा होने का खतरा बढ़ गया है।

बाजार की गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की स्थिति सबसे बड़ी वजह है। युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा LPG सप्लाई पर लगाए गए प्रतिबंधों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए ईंधन की कमी और महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है, जिससे निवेशक डरे हुए हैं।

इन प्रमुख कंपनियों पर रही निवेशकों की निगाहें

भले ही बाजार लाल निशान में था, लेकिन कुछ कंपनियों ने अपने बिजनेस अपडेट्स से ध्यान खींचा:

  • Ashok Leyland: कंपनी ने चेन्नई में नई बैटरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए ₹400-500 करोड़ के निवेश का ऐलान किया है।

  • KEC International: कंपनी को ₹1,476 करोड़ के नए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ऑर्डर मिले हैं।

  • Wipro: विप्रो ने अमेरिकी बीमा कंपनी के साथ एक बड़ा मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है, जो भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।

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Thetarget365

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