Share Market Crash
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए 9 अप्रैल 2026 की सुबह निवेशकों के लिए निराशाजनक संकेत लेकर आई। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। कारोबार शुरू होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दोनों ही प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। निवेशकों की बढ़ती चिंता के बीच बाजार में शुरुआती सत्र से ही अफरा-तफरी का माहौल रहा, जिससे प्रमुख सूचकांकों ने अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों को खो दिया।
आज सुबह जैसे ही ट्रेडिंग की घंटी बजी, सेंसेक्स 531.59 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 77,031.31 के स्तर पर फिसल गया। गिरावट का यह सिलसिला निफ्टी में भी बरकरार रहा, जहाँ निफ्टी 153.80 अंकों टूटकर 23,843.55 पर आ पहुँचा। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि निफ्टी ने 23,900 के उस मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया, जिसे निवेशक एक मजबूत सपोर्ट मान रहे थे। बाजार खुलते ही 500 अंकों से ज्यादा की यह गिरावट इस बात का संकेत है कि ट्रेडर फिलहाल जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं।
बाजार के इस मंदी भरे दौर में भी कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। एनटीपीसी (NTPC), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), मैक्स हेल्थकेयर, बजाज ऑटो और हिंडाल्को जैसी कंपनियों के शेयरों में शुरुआती खरीदारी देखी गई, जिससे इन्हें कुछ बढ़त मिली। इसके विपरीत, दिग्गजों की सूची में शामिल बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स, इंफोसिस और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) जैसे बड़े नामों को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लगभग 1215 शेयरों में तेजी रही, जबकि 1288 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। सबसे प्रमुख कारण कच्चे तेल की कीमतों में जारी अस्थिरता है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच घोषित हुए सीजफायर को लेकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के मन में अभी भी गहरा संदेह बना हुआ है। हालांकि कागजों पर युद्धविराम हो चुका है, लेकिन सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने ट्रेडर्स को ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की स्थिति में डाल दिया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी एक बड़ी वजह बनकर उभरा है।
आज के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और वित्तीय (Finance) क्षेत्र के शेयरों ने सबसे ज्यादा निराश किया। अमेरिका की आर्थिक नीतियों और वहां से मिलने वाले संकेतों के कारण भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। बैंकिंग सेक्टर में भी मुनाफावसूली हावी रही, जिसके चलते बैंकिंग इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई। केवल ऑटो और कुछ चुनिंदा पीएसयू (PSU) शेयरों ने ही बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन वे सेंसेक्स को गिरने से बचाने में नाकाम रहे।
बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान स्थितियां काफी उतार-चढ़ाव भरी हैं, इसलिए छोटे और खुदरा निवेशकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार में इस समय पैनिक सेलिंग (डर में आकर बेचना) से बचें। यदि आपके पोर्टफोलियो में अच्छे फंडामेंटल्स वाली कंपनियां हैं, तो उनमें लंबी अवधि के लिए निवेश बनाए रखना समझदारी होगी। नए निवेश के लिए बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए और गिरावट में ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति केवल मजबूत शेयरों में ही अपनानी चाहिए।
आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के भाव पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और सप्लाई चेन सुचारू होती है, तो बाजार में रिकवरी देखी जा सकती है। फिलहाल, भारतीय निवेशकों की नजर विदेशी निवेशकों के रुख और आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी है। बाजार में स्थिरता आने तक जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना ही सफल निवेश का मूलमंत्र है।
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