Seraikela Elephant Attack
Seraikela Elephant Attack: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में जंगली हाथियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने शनिवार रात एक और जान ले ली, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। झारखंड के विभिन्न हिस्सों में मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाएं अब प्रशासन और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।
ताजा मामला कुकड़ू प्रखंड की लेटेमदा पंचायत का है, जहां नुतुनडीह गांव में जंगली हाथी ने एक किसान पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान 50 वर्षीय बुका महतो उर्फ गौरांग महतो के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात जब गौरांग अपने घर के समीप थे, तभी अचानक एक जंगली हाथी वहां आ धमका। इससे पहले कि गौरांग खुद को बचा पाते, हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई। चांडिल रेंज के रेंजर शशि प्रकाश और फॉरेस्टर राधारमण ठाकुर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। विभाग की ओर से मृतक के आश्रितों को तत्काल राहत के रूप में $50,000$ रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम और अन्य सरकारी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद शेष मुआवजा राशि का भुगतान जल्द ही बैंक खाते के माध्यम से कर दिया जाएगा।
ग्रामीणों को भविष्य के हमलों से बचाने के लिए वन विभाग ने एहतियाती कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच तीन शक्तिशाली टॉर्च लाइट और हाथी भगाने के लिए विशेष ‘बम-पटाखे’ वितरित किए हैं। रेंजर शशि प्रकाश ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के नजदीक न जाएं और रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिनमें पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक साव और मुखिया इंद्रजीत सिंह शामिल हैं, ने भी वन विभाग से गश्त बढ़ाने और हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर खदेड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाने की मांग की है।
झारखंड में साल 2025 मानव-हाथी संघर्ष के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, केवल 16 से 19 दिसंबर के बीच ही हाथियों के हमले में 6 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं। इस पूरे वर्ष में अब तक हाथियों के हमले से होने वाली मौतों का आंकड़ा 16 के पार पहुंच गया है। यह स्थिति राज्य के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक गंभीर संकट बन गई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और वन अधिकारियों का मानना है कि इस संघर्ष के पीछे कई गहरे कारण हैं:
आवास का विनाश: जंगलों की अंधाधुंध कटाई और व्यापक खनन गतिविधियों के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं।
कॉरिडोर का टूटना: नई सड़कों और बुनियादी ढांचों के निर्माण से हाथियों के पारंपरिक रास्ते (Corridors) बाधित हो गए हैं, जिससे वे भटक कर गांवों में घुस आते हैं।
संसाधनों की कमी: पानी और भोजन की तलाश में जंगली जानवर इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं।
मानवीय हस्तक्षेप: कई बार ग्रामीण हाथियों पर पत्थर फेंकते हैं या उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश करते हैं, जिससे हाथी हिंसक हो जाते हैं।
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