Punjab Politics: आम आदमी पार्टी (AAP) के सन्नौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को हरियाणा के करनाल से गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आ रही है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यह मामला उस समय तूल पकड़ गया जब गिरफ्तारी से पहले पठानमाजरा ने एक वीडियो जारी कर इसे सियासी साजिश बताया।

IPC की धारा 376 के तहत केस दर्ज
पठानमाजरा ने वीडियो में खुलासा किया कि उनके खिलाफ IPC की धारा 376 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह केस 1 सितंबर 2025 को पटियाला के सिविल लाइन थाने में दर्ज हुआ, जो जीरकपुर की एक महिला की शिकायत पर आधारित है। महिला का दावा है कि 2013-14 में उनकी पठानमाजरा से सोशल मीडिया पर जान-पहचान हुई और 2021 में उन्होंने ‘आनंद कारज’ के जरिए विवाह किया।

विधायक ने लगाए राजनीतिक दबाव के आरोप
गिरफ्तारी से पहले जारी वीडियो में पठानमाजरा ने कहा, “दिल्ली की AAP टीम पंजाब पर हावी होने की कोशिश कर रही है। मैंने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक नाकामी पर आवाज उठाई थी, इसीलिए मुझ पर झूठा केस दर्ज किया गया है।” उन्होंने एक आईएएस अधिकारी किशन कुमार पर भी बाढ़ राहत कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाया था, जिसके बाद उनके गनमैन भी हटा लिए गए।
महिला पर दर्ज हैं 5 FIR
विधायक के वकील बिक्रमजीत सिंह भुल्लर ने बताया कि शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत पहले से 4-5 एफआईआर दर्ज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च 2022 में विधायक बनने के बाद महिला ने अगस्त 2022 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके आधार पर रोपड़ पुलिस को जांच के आदेश मिले थे।
AAP में आंतरिक कलह के संकेत?
हरमीत सिंह पठानमाजरा का यह बयान कि “दिल्ली वाले पंजाब पर राज कर रहे हैं और उन्हें सरकार चलानी नहीं आती”, आम आदमी पार्टी में अंदरूनी मतभेद की ओर इशारा करता है। उन्होंने पार्टी के अन्य विधायकों और मंत्रियों से जागने की अपील की और दावा किया कि उन्होंने पंजाब की खातिर अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगाया है।
जनता से की समर्थन की अपील
पठानमाजरा ने जनता से अपील की कि अगर उन्हें उनका उठाया मुद्दा सही लगे, तो उनकी वीडियो को साझा करें और पटियाला के डीसी और एसएसपी कार्यालय का घेराव करें। उन्होंने कहा, “अगर आज आवाज नहीं उठाई, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।”
हरमीत सिंह पठानमाजरा की गिरफ्तारी और उस पर लगे गंभीर आरोप केवल कानूनी मसला नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में अंदरूनी संघर्ष और सत्ता की खींचतान को भी उजागर करते हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला क्या मोड़ लेता है।










