BAN vs AFG : अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में 0-3 से करारी शिकस्त झेलने के बाद बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को स्वदेश लौटने पर फैंस के भारी विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ा। टीम का प्रदर्शन इस सीरीज में इतना निराशाजनक रहा कि बांग्लादेश तीनों मैचों में ऑलआउट हो गया।
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एयरपोर्ट से लौटते वक्त फैंस ने टीम की गाड़ी पर हमला भी किया और खिलाड़ियों को हूटिंग झेलनी पड़ी, जिससे देश में क्रिकेट प्रेमियों के बीच व्याप्त निराशा और गुस्सा साफ झलक रहा है।
अफगानिस्तान ने इस सीरीज में बांग्लादेश को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया:
पहला वनडे: बांग्लादेश 221 पर सिमटा और अफगानिस्तान ने 5 विकेट से जीत दर्ज की।
दूसरा वनडे: अफगानिस्तान 190 पर ऑलआउट हुई, लेकिन बांग्लादेश इस छोटे लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर पाया और 81 रन से हार गया।
तीसरा वनडे: सबसे शर्मनाक प्रदर्शन देखने को मिला, जब 294 रनों का पीछा करते हुए बांग्लादेशी टीम सिर्फ 93 रनों पर ऑलआउट हो गई।
इस खराब प्रदर्शन ने फैंस को आक्रोशित कर दिया।
फैंस के उग्र व्यवहार और कथित हमले के बाद, बांग्लादेशी खिलाड़ी मोहम्मद नईम शेख ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और हृदयस्पर्शी संदेश पोस्ट किया।अपने फेसबुक अकाउंट पर उन्होंने लिखा, “हम ग्राउंड पर सिर्फ खेलते नहीं है, हम अपने देश का नाम अपने सीने पर लेकर चलते हैं। हमारे देश का झंडा हमारी जर्सी पर ही नहीं होता बल्कि ये हमारे खून में होता है। हर बॉल, रन और हर सांस के साथ हम कोशिश करते हैं कि इस झंडे को गौरवान्वित करें।”
नईम शेख ने फैंस की नाराजगी को समझते हुए लिखा, “हां, कभी हम सफल और कभी असफल होते हैं। जीत-हार होती है, यही खेल की सच्चाई है। हमें पता है कि हमारी हार आपको दुखी करती है, आपको गुस्सा आता है क्योंकि आप भी इस देश को हमारे जितना ही प्यार करते हो।”
लेकिन उन्होंने फैंस के व्यवहार पर दुख व्यक्त किया, “लेकिन आज जिस तरह हम पर नफरत की गई, हमारी गाड़ियों पर हमला किया गया वो दुखद है। हम भी इंसान हैं, गलतियां करते हैं लेकिन हम कभी भी अपने देश के लिए प्यार और प्रयास की कमी नहीं करते।”
उन्होंने अपने संदेश को समाप्त करते हुए फैंस से अपील की, “हम नफरत नहीं, प्यार चाहते हैं। आलोचना करें तो तर्क के साथ, न कि गुस्से के साथ। क्योंकि हम सभी एक झंडे के बच्चे हैं, जीते या हारें, हमारा झंडा हम सभी के लिए गर्व का स्त्रोत होना चाहिए, गुस्से का नहीं। हम लड़ेंगे और फिर से उठेंगे। देश के लिए, आपके लिए और इस झंडे के लिए।”
यह घटना दिखाती है कि बांग्लादेश में क्रिकेट प्रेम किस चरम पर है, लेकिन यह भी सवाल उठाती है कि फैंस के गुस्से की सीमा क्या होनी चाहिए।
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