Sharad Pawar
Sharad Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शरद पवार ने शनिवार को बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य की सियासत में चल रही अटकलों पर बड़ा बयान दिया है। पवार ने खुलासा किया कि पिछले कुछ समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों—शरद पवार और अजित पवार गुट—के बीच विलय को लेकर बातचीत चल रही थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जो चर्चा एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही थी, वह फिलहाल रुक गई है। इस खुलासे के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है कि क्या भविष्य में भी इन दोनों पार्टियों के साथ आने की कोई गुंजाइश बची है या नहीं।
शरद पवार ने विस्तार से बताते हुए कहा कि विलय को लेकर पिछले चार महीनों से परदे के पीछे काफी काम चल रहा था। उनकी पार्टी की ओर से जयंत पाटिल और दूसरे गुट की ओर से अजित पवार के बीच निरंतर संवाद बना हुआ था। पवार के मुताबिक, “चर्चा बहुत सकारात्मक थी और हम इस निष्कर्ष पर पहुँच चुके थे कि 12 तारीख को इसकी सार्वजनिक घोषणा कर दी जाएगी।” यह जानकारी पहली बार सार्वजनिक हुई है, जिससे पता चलता है कि शरद और अजित के बीच दूरियाँ कम करने की कोशिशें काफी गंभीर स्तर पर की गई थीं, जो अंतिम समय में किन्हीं कारणों से पटरी से उतर गईं।
विलय की चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला सुनेत्रा पवार का महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना रहा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शरद पवार ने कहा कि उन्हें इस निर्णय के बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के निर्णय के बारे में मुझसे कोई परामर्श नहीं किया गया था। उनकी पार्टी (अजित पवार गुट) ने स्वतंत्र रूप से यह तय किया होगा।” पवार ने यह भी जोड़ा कि अस्थि विसर्जन के कार्यक्रम तक सुनेत्रा उनके साथ ही थीं, लेकिन उन्होंने इस बड़े राजनीतिक कदम के बारे में कोई संकेत नहीं दिया था।
एक तरफ जहाँ कूटनीतिक मतभेद उभरे हैं, वहीं शरद पवार ने अजित पवार की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की। उन्होंने अजित पवार को एक ‘सक्षम और प्रतिबद्ध नेता’ बताया जिन्होंने हमेशा जनता के दुख-दर्द को प्राथमिकता दी। पवार ने कहा, “अजित ने वास्तव में जमीन पर उतरकर काम किया और बारामती की जनता इसीलिए हमेशा उनके साथ खड़ी रही। वे जनसमस्याओं के समाधान के लिए सदैव प्रयासरत रहते थे।” उनके अचानक चले जाने (संदर्भ: वर्तमान राजनीतिक अलगाव या घटनाक्रम) ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया है।
शरद पवार ने वर्तमान स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए आह्वान किया कि अब मजबूती के साथ आगे बढ़ने का समय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परिवार की नई पीढ़ी निश्चित रूप से अजित पवार की विरासत और कार्यपद्धति को आगे बढ़ाएगी। पवार के इस बयान को एक भावनात्मक कार्ड के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ वे एक ओर राजनीतिक रूप से अलग खड़े हैं, लेकिन दूसरी ओर परिवार और कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दे रहे हैं।
शरद पवार के इस बयान से यह साफ हो गया है कि सुनेत्रा पवार की ताजपोशी के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के बीच की खाई फिर से चौड़ी हो गई है। विलय की चर्चा रुकने का सीधा असर आने वाले चुनावों और राज्य के समीकरणों पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि अजित पवार गुट इस पर क्या सफाई देता है और क्या भविष्य में दोबारा कोई ‘पैच-अप’ की स्थिति बनती है। महाराष्ट्र की जनता की नजरें अब बारामती के इस ‘पवार पावर’ गेम पर टिकी हुई हैं।
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