Stock Market Crash
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 मार्च 2026 का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ के रूप में दर्ज हो गया है। बुधवार को बाजार में जो हरियाली और तेजी देखी गई थी, उसने निवेशकों को उम्मीद दी थी, लेकिन गुरुवार की सुबह ने उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वैश्विक बाजारों से मिले निराशाजनक संकेतों और पश्चिम एशिया में भड़की युद्ध की भीषण आग ने भारतीय शेयर बाजार (दलाल स्ट्रीट) को बुरी तरह झुलसा दिया है। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि देखते ही देखते प्रमुख सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढह गए। निवेशकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है और महज कुछ ही मिनटों के कारोबार में अरबों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।
आज के कारोबारी सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1600 अंकों से भी अधिक की गोता लगाते हुए 75,133 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 510 अंकों की भारी गिरावट के साथ 23,300 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास संघर्ष करता नजर आया। बाजार की इस बदहाली की आहट सुबह ही मिल गई थी, जब ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) ने 550 अंकों की गिरावट के साथ शुरुआत की थी। इस जबरदस्त भूचाल ने बैंकिंग, आईटी और ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों को धराशायी कर दिया है, जिससे पोर्टफोलियो में लाल निशान की बाढ़ आ गई है।
बाजार में आई इस सुनामी के पीछे सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और युद्ध का विस्तार है। अब यह संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचों (Energy Infrastructure) को निशाना बनाया जा रहा है। गैस फील्ड्स और तेल के कुओं पर हमलों ने वैश्विक सप्लाई चेन को खतरे में डाल दिया है। निवेशकों को डर है कि यदि ऊर्जा के इन महत्वपूर्ण केंद्रों पर हमले जारी रहे, तो कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी। तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है, यही डर आज बाजार में बिकवाली का मुख्य ट्रिगर बना।
भारतीय बाजारों पर केवल क्षेत्रीय युद्ध का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से आए ‘डबल अटैक’ का भी असर पड़ा है। अमेरिका में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) के आंकड़ों ने वैश्विक निवेशकों की नींद उड़ा दी है। महंगाई बढ़ने के डर से अमेरिकी इंडेक्स ‘डाओ जोंस’ 750 अंकों से ज्यादा टूट गया, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार की ओपनिंग पर पड़ा। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के एक बयान ने ‘आग में घी’ डालने का काम किया है। फेड ने भले ही ब्याज दरों में बदलाव न किया हो, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग वैश्विक महंगाई को बेकाबू कर सकती है, जिससे लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी।
भारतीय बाजार इस वैश्विक मंदी की लहर में अकेले नहीं हैं। आज पूरे एशिया के शेयर बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। जापान के निक्केई से लेकर हॉन्गकॉन्ग के हैंग सेंग तक, लगभग सभी प्रमुख एशियाई सूचकांक भारी गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। वैश्विक निवेशकों के मन में यह डर बैठ गया है कि अगर युद्ध का दायरा और बढ़ा, तो दुनिया एक बार फिर 2008 जैसी आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती है। इस अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित संपत्तियों जैसे सोने की ओर भाग रहे हैं, जिससे इक्विटी मार्केट से भारी मात्रा में फंड बाहर निकल रहा है।
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