Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों के बीच चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। बीएसई (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स एक समय 537.43 अंक की भारी गिरावट के साथ 79,478.47 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी अछूता नहीं रहा और वह 153.85 अंक फिसलकर 24,612.05 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। इस गिरावट ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
आईटी और डिफेंस सेक्टर में चमक: इन शेयरों ने संभाला मोर्चा
भले ही बाजार लाल निशान में खुला, लेकिन आईटी (IT) और डिफेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूती दिखाई। शुरुआती सत्र के दौरान निफ्टी पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस (TCS) और विप्रो जैसे शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखी गई। वैश्विक मांग और मजबूत तिमाही नतीजों की उम्मीद में आईटी दिग्गजों ने गिरावट को थामने की कोशिश की। डिफेंस स्टॉक्स में भी निवेशकों का भरोसा कायम रहा, जिससे इन शेयरों ने हरे निशान में रहकर कारोबार किया।
बैंकिंग और सीमेंट शेयरों पर मार: ये स्टॉक्स रहे टॉप लूजर्स
बाजार की इस गिरावट में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, एविएशन और सीमेंट सेक्टर पर पड़ी। घाटे में रहने वाले प्रमुख शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo), आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और एलएंडटी (L&T) जैसे बड़े नाम शामिल रहे। बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली के कारण वित्तीय सूचकांक दबाव में दिखे। साथ ही, स्टील और सीमेंट जैसे कमोडिटी आधारित शेयरों में कमजोरी ने सेंसेक्स को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई। इंफ्रास्ट्रक्चर दिग्गज एलएंडटी में भी मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण और वैश्विक संकेत
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ने भारतीय बाजार पर दबाव बनाया है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों से मिलने वाले कमजोर संकेतों ने भी आग में घी का काम किया है। निवेशकों को डर है कि यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की लिक्विडिटी पर पड़ता है।
निवेशकों के लिए बाजार की आगे की रणनीति
शेयर बाजार के इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बाजार अब एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल की तलाश कर रहा है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि यदि निफ्टी 24,500 के स्तर से नीचे गिरता है, तो आने वाले सत्रों में और अधिक गिरावट देखी जा सकती है। ऐसी स्थिति में, लंबी अवधि के निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले ब्लू-चिप शेयरों में धीरे-धीरे खरीदारी (SIP मोड) करने पर विचार करना चाहिए, जबकि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस के साथ ही अपनी पोजीशन बनानी चाहिए।
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