Stock Market Crash
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन किसी ब्लैक फ्राइडे से कम साबित नहीं हुआ। दिन की शुरुआत तो उम्मीद जगाने वाली थी, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान के साथ खुले थे, लेकिन यह तेजी महज एक छलावा साबित हुई। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ीं, बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस भारी गिरावट के कारण महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई स्वाहा हो गई। सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों के भरोसे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
कारोबार के शुरुआती घंटों में सेंसेक्स 82,335.94 पर खुला और देखते ही देखते 82,516.27 के उच्च स्तर को छू लिया। उस वक्त बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला आज थम जाएगा। हालांकि, दोपहर होते-होते ‘प्रॉफिट बुकिंग’ का ऐसा दौर चला कि बाजार संभल नहीं सका। दोपहर 2:28 बजे तक सेंसेक्स 0.83% लुढ़क कर 81,617.90 के स्तर पर आ गया। निफ्टी भी अपने ऊंचे स्तर 25,347.95 से फिसलकर 25,066.10 के निचले स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट का सीधा असर बीएसई (BSE) की कंपनियों के मार्केट कैप पर पड़ा, जो घटकर 452.69 लाख करोड़ रुपये रह गया।
बाजार में आई इस सुनामी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बेरुखी को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2026 में विदेशी निवेशकों ने केवल एक दिन खरीदारी की है, जबकि बाकी सभी सत्रों में वे शुद्ध बिकवाल रहे हैं। अकेले गुरुवार को ही एफआईआई ने 2,550 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार के हर छोटे उछाल का इस्तेमाल अपनी होल्डिंग कम करने के लिए कर रहे हैं। जब तक कॉर्पोरेट अर्निंग्स (तिमाही नतीजे) में सुधार नहीं दिखता, तब तक विदेशी पूंजी की वापसी मुश्किल नजर आ रही है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रणनीतिकारों का मानना है कि वर्तमान में बाजार पूरी तरह से ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। निवेशकों की नजरें अब 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं। बाजार को उम्मीद है कि सरकार कुछ ऐसी घोषणाएं करेगी जिससे अर्थव्यवस्था को नई गति मिले। हालांकि, बजट से भी अधिक महत्वपूर्ण कंपनियों के तिमाही नतीजे होंगे। यदि बड़ी कंपनियों की आय में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि नहीं होती है, तो विदेशी निवेशक अन्य सस्ते बाजारों का रुख करना जारी रख सकते हैं, जो भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित होगी।
शेयर बाजार की इस आग में रुपये की कमजोरी ने घी डालने का काम किया है। शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time low) 91.77 पर पहुंच गया। आयातकों और कॉर्पोरेट्स की तरफ से डॉलर की भारी मांग ने रुपये की वैल्यू को 0.2% तक गिरा दिया। जब भी मुद्रा में इस तरह की गिरावट आती है, तो विदेशी निवेशकों में घबराहट बढ़ती है क्योंकि इससे उनकी डॉलर की कमाई कम हो जाती है। रुपये का यह ऐतिहासिक गोता घरेलू संपत्तियों और शेयर बाजार की धारणा को और अधिक नकारात्मक बना रहा है।
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