Shashi Tharoor Meeting
Shashi Tharoor Meeting: कांग्रेस पार्टी के भीतर पिछले कुछ दिनों से जारी खींचतान और कथित मतभेदों के बीच गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने संसद भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में राहुल गांधी और खरगे के साथ लंबी मुलाकात की। इस बैठक को पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की अहम बैठक में थरूर की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे, जिसका जवाब अब इस मुलाकात के जरिए देने की कोशिश की गई है।
राहुल गांधी और खरगे से मुलाकात के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने एक तस्वीर पोस्ट करते हुए दोनों नेताओं को “गर्मजोशी भरी और सार्थक चर्चा” के लिए धन्यवाद दिया। थरूर ने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत के लोगों की सेवा के प्रति कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है और वे सभी अब ‘एक ही पेज’ पर हैं। इस पोस्ट का उद्देश्य उन कयासों को शांत करना था, जिनमें दावा किया जा रहा था कि थरूर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज हैं और अलग राह चुन सकते हैं।
थरूर ने स्पष्ट किया कि एआईसीसी की बैठक में शामिल न होने के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं थी, बल्कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के बारे में सूचित कर दिया था। वह केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई किताब ‘श्री नारायण गुरु’ पर व्याख्यान देने गए थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी के साथ कुछ ‘मसले’ जरूर हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक मंच पर साझा करने के बजाय नेतृत्व के साथ निजी तौर पर सुलझाना पसंद करेंगे। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ बातें सच हो सकती हैं और कुछ नहीं, लेकिन अनुशासन का पालन करना जरूरी है।
विवाद की जड़ें 19 जनवरी को कोच्चि में आयोजित पार्टी की ‘महापंचायत’ से जुड़ी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब राहुल गांधी मंच पर पहुंचे, तब शशि थरूर वहां भाषण दे रहे थे। आरोप है कि राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल और अन्य स्थानीय नेताओं का अभिवादन किया, लेकिन थरूर की ओर सीधे तौर पर ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं, राहुल ने अपने संबोधन में कई नेताओं के नाम लिए, लेकिन वहां मौजूद रहने के बावजूद थरूर का नाम नहीं लिया गया। इस घटना को थरूर के समर्थकों ने उनके ‘गहरे अपमान’ के रूप में देखा, जिससे यह चर्चा तेज हो गई कि हाईकमान थरूर को हाशिए पर धकेलने की कोशिश कर रहा है।
गुरुवार की इस मुलाकात के बाद अब यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व केरल विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी तरह की गुटबाजी को पनपने नहीं देना चाहता। शशि थरूर केरल में एक बेहद लोकप्रिय चेहरा हैं और उनकी अनदेखी पार्टी को भारी पड़ सकती है। मल्लिकार्जुन खरगे ने इस बैठक के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वरिष्ठ नेताओं के सुझावों और उनकी गरिमा का पार्टी में पूरा सम्मान है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में केरल कांग्रेस की राजनीति में थरूर की भूमिका कितनी सक्रिय रहती है।
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